फेस्टिवल की जान रहे नवाजुद्दीन सिद्दीकी, श्री अनिरुद्ध आचार्य जी और राजपाल यादव
- नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी अनोखी शैली में यह बताया कि कहानियां केवल किताबों या स्क्रीन तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि वे दिलों में बसती हैं।
- श्री अनिरुद्ध आचार्य जी ने अपने ज्ञान को हास्य के साथ जोड़कर ऐसा माहौल बनाया कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।
- राजपाल यादव की "बिहाइंड द लाफ्टर" सेशन में उनकी ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव और संघर्ष की कहानियां सुनकर लोग हंसे भी और भावुक भी हुए।
इन तीनों की उपस्थिति ने इस फेस्टिवल को और भी यादगार बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत
दिन की शुरुआत इस्कॉन द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई, जिसने पूरे माहौल को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद कार्यक्रम एक किताब की तरह खुलता चला गया, हर पन्ना पहले से ज्यादा रोमांचक। "विज़डम एंड वर्ड्स" पैनल में चैतन्य दास और दिवस गुप्ता ने साहित्य और आध्यात्म के गहरे संबंध पर चर्चा की, जिससे दर्शक पूरी तरह जुड़ गए। "स्टार्ट-अप सागा" में अजय सेतिया, प्रफुल्ल बिल्लोरे (MBA चायवाला) और मोहम्मद अली शाह ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कीं, जो युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक रहीं।
डिजिटल युग में रुचि रखने वालों के लिए "हेल्थ, ह्यूमर एंड हेडलाइंस" पैनल बेहद खास रहा, जहां इमरान पटेल, गौरव ठाकुर और हिमेश मदान ने बताया कि कैसे यूट्यूब और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स आज की दुनिया में ज्ञान साझा करने का सबसे बड़ा माध्यम बन गए हैं। वहीं, "शेपिंग माइंड्स" सत्र में विजेंद्र चौहान, रुमाना सिन्हा सहगल और अजय ठाकुर ने शिक्षा के बदलते स्वरूप पर चर्चा की।
"स्पिरिचुअलिटी विद अ स्माइल" में श्री अनिरुद्ध आचार्य जी और सागर सेतिया ने दिखाया कि आध्यात्म और हास्य एक साथ कैसे चलते हैं। वहीं, "ड्रामा, डायलॉग्स और डेस्टिनी" में अमोल पाराशर और रेविका मलिक ने सिनेमा और साहित्य की दुनिया को करीब से दिखाया। और फिर, वह समय आया जब हंसी अपने सबसे सच्चे रूप में सामने आई—राजपाल यादव ने "बिहाइंड द लाफ्टर" में अमित भाटिया (ABP न्यूज) के साथ अपनी अनसुनी कहानियां साझा कीं, जिसने सबका दिल जीत लिया।
अमर उजाला अवॉर्ड्स के तहत किया गया सम्मानित
फेस्टिवल में किताबों का भी खास स्थान रहा। अजय सेतिया की "लीड थ्रू द माइंड ऑफ अ डिक्टेटर" समेत दीक्षा अरोड़ा, संजय कथूरिया और श्री अनिरुद्ध आचार्य जी की किताबों का लोकार्पण हुआ। इसके अलावा, अमर उजाला अवॉर्ड्स के तहत राजपाल यादव, अजय ठाकुर, अमोल पाराशर, अनिरुद्ध आचार्य और मोहम्मद अली शाह ने उन व्यक्तियों को सम्मानित किया, जो अपने-अपने क्षेत्रों में बदलाव ला रहे हैं। सम्मानित लोगों में एला डी वर्मा, मैगी और देवांश, आरजे प्रिंसी, साक्षी जैन, मल्हार कलंबे और कई अन्य शामिल थे।
जैसे-जैसे दिन ढल रहा था, वैसे-वैसे फेस्टिवल अपने सबसे सुरीले पल की ओर बढ़ रहा था—सुफी नाइट, जहां अदिति शर्मा की जादुई आवाज ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। हर कोई संगीत की लय में खो गया और इस यादगार शाम की मिठास को अपने साथ घर ले गया।
संस्थापकों के विचार
"इनविंसिबल फेस्टिवल सिर्फ एक इवेंट नहीं है, यह एक ऐसा मंच है जहां कहानियां, विचार और जोश से भरे लोग एक साथ आते हैं। हर साल हम इसे और खास बनाने की कोशिश करते हैं, और इस बार का अनुभव सबसे बेहतरीन रहा। हमें अगले साल इसे और बड़ा बनाने का इंतजार है।"
— अजय सेतिया, संस्थापक, इनविंसिबल फेस्टिवल
"इस फेस्टिवल की ऊर्जा और उत्साह ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। साहित्य से लेकर बिज़नेस तक, आध्यात्म से लेकर व्यक्तिगत विकास तक, हमने ऐसा मंच तैयार किया है जहां लोग सीखें, जुड़ें और प्रेरित हों। यहां लोगों की मुस्कान और भागीदारी देखकर सारी मेहनत सफल लगती है।"
— सागर सेतिया, सह-संस्थापक, इनविंसिबल फेस्टिवल