विद्यार्थी नर्सिंग में बीएससी भी कर सकते हैं। इस कोर्स को बीएससी नर्सिंग कहा जाता है। इसके लिए अलावा जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिड्वाइफरी) और एएनएम (ऑग्ज़िल्यरी नर्सिंग मिड्वाइफ/हेल्थ वर्कर ) कोर्स भी कर सकते हैं। इन सभी का पाठ्यक्रमों की अवधि अलग-अलग होती है। जीएनएम कोर्स की अवधि तीन साल होती है। नर्सिंग के बाद आप अस्पतालों में स्टाफ नर्स के तौर पर नियुक्त होते हैं। दो-तीन साल के अनुभव के बाद स्टाफ नर्स को वार्ड सिस्टर का पद प्राप्त होता है। नर्सिंग करने के बाद अभ्यर्थी सरकारी और निजी दोनों ही अस्पतालों में नौकरी पर लग सकते हैं।
सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ ही कम्युनिटी हेल्थ नर्सेस, स्पेशल क्लिनिक व केयर सेंटर, स्कूल हेल्थ नर्सेस, इंडस्ट्रीयल नर्स और आर्म्ड फोर्सेस, ड्रग कंपनी और काउंसलिंग सेंटर में भी नौकरी कर सकते हैं। इतना ही नहीं अभ्यर्थी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षक भी बन सकते हैं।
नर्सिंग का कोर्स अभ्यर्थी सरकारी और निजी दोनों ही कॉलेजों से कर सकते हैं। सरकारी कॉलेज से नर्सिंग कोर्स करने में कम खर्च आता है। सरकारी कॉलेज से अभ्यर्थी 30-40 हजार में नर्सिंग का कोर्स कर सकते हैं। जबकि निजी कॉलेजों में इस कोर्स का खर्च एक लाख से ऊपर आ सकता है। अन्य कोर्सों की तरह ही नर्सिंग के कोर्स में भी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप मिलती है। पढ़ने में अच्छे विद्यार्थी इस कोर्स में स्कॉलरशिप प्राप्त कर सकते हैं। नर्सिंग में वेतन भी योग्यता के हिसाब से अलग-अलग मिलता है। नर्सिंग के कोर्स के बाद नए लोगों को प्रति महीना 10 हजार से लेकर 17 हजार रुपये तक वेतन मिलता है। जबकि अनुभव बढ़ने पर वेतन भी बढ़ता रहता है। नर्सिंग कोर्स के बाद अभ्यर्थी विदेश भी जा सकते हैं।