भारत में शिक्षा प्राप्त करने के लिए 6 लाख स्कूलों में कमरों की कमी उजागर हो रही है। लेकिन इसके विपरीत भारत में स्कूलों की कमी, क्लास रूम की कमी शिक्षा व्यव्स्था पर चोट करती है। ऐसे में भारत की शिक्षा प्रणाली पर सवालिया निशान खड़े होते हैं।
शौचालय न होने की वजह से बच्चे निरंतर कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। वहीं शिक्षा व्यव्यथा में जातिवाद का नारा भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहा है। यह अलग बात है भारतीय संविधान में अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए अलग प्रावधान है।
शिक्षा प्रणाली में एससी, एसटी जाति वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए व्यव्स्था की गई थी। लेकिन आज सामान्य वर्ग के लोग इस तरह की शिक्षा प्रणाली के खिलाफ आवाज भी बुलंद कर कर रहे है। क्योंकि उनका मानना है कि योग्यता के आधार पर स्कूल और कॉलेजो में दाखिले किए जाएं।