स्कूली शिक्षा के बजट में 500 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि की गई है, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए अनुदान पिछले वित्तीय वर्ष के संशोधित अनुमान (आरई) से 9600 करोड़ रुपये से अधिक कम कर दिया गया है।
गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित 2024-25 के अंतरिम बजट में, यूजीसी के लिए फंडिंग को पिछले वर्ष के 6409 करोड़ रुपये से घटाकर 2500 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 60.99 प्रतिशत की गिरावट है।
आईआईएम को लगातार दूसरे साल बजट में कटौती का सामना करना पड़ा है। पिछले साल, IIM का बजट 608.23 करोड़ रुपये* (आरई) से घटाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इस साल बजट को संशोधित अनुमान 331 करोड़ रुपये से घटाकर 212.21 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के बजट में भी पिछले साल के आरई से मामूली गिरावट देखी गई है। शीर्ष प्रौद्योगिकी संस्थानों को अनुदान 10,384.21 करोड़ रुपये के आरई से घटकर 10324.50 रुपये हो गया है।
हालांकि, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए सहायता अनुदान में 28 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों का बजट 12000.08 करोड़ रुपये के आरई से बढ़ाकर 15472 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
स्कूली शिक्षा का बजट 72473.80 करोड़ रुपये (आरई) से बढ़कर 73008.10 करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, उच्च शिक्षा का बजट 57244.48 करोड़ रुपये (आरई) से घटकर 47619.77 करोड़ रुपये हो गया है।
अंतरिम बजट पेश करते हुए, सीतारमण ने कहा कि 2014 के बाद से बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा के नए संस्थान, सात आईआईटी, 16 आईआईआईटी, सात आईआईएम, 15 एम्स और 390 विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं, जबकि 3000 नए आईटीआई स्थापित किए गए हैं।