भारतीय छात्रों को भले ही इस साल ब्रिटेन ने बड़ी संख्या में वीजा जारी किया गया हो, लेकिन महंगाई बढ़ने के साथ ही उन शहरों में इन छात्रों का रहना और मुश्किल हो गया है, जहां उनके कॉलेज या विश्वविद्यालय स्थित हैं। छात्रों और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, विदेश में पढ़ाई और यात्रा छात्रों के लिए एक मुश्किल का सबब बन गया है। खासकर जो अभी-अभी देश में आए हैं। उनके लिए यह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। छात्रों के पास विदेशी देश में उनके सिर पर छत तक नहीं है। छात्रों का संकट केवल एक घर खोजने तक ही सीमित नहीं है,बल्कि लगातार बढ़ती खाद्य मुद्रास्फीति है,जिसने उनके दैनिक खर्चों में वृद्धि की है।
एक छात्रा चयनिका दुबे ने कहा, "मुझे पिछले साल 1 अक्तूबर से 21 अक्तूबर के बीच Airbnbs के बीच शिफ्टिंग के दौरान लगभग 1 लाख रुपये खर्च करने के लिए मजबूर किया गया था। लंदन में आने के बाद घर के लिए 10 से अधिक घरों को देखा गया था। मैं कॉलेज के बाद भी सप्ताह के दिनों में हर रोज बाहर जाती थी। बता दें कि चयनिका दुबे जो लंदन के गोल्डस्मिथ विश्वविद्यालय में प्रशासन और सांस्कृतिक नीति में मास्टर्स करने के लिए तीन महीने पहले यूके गई थीं।
वहीं वर्तमान में बर्मिंघम में एस्टन विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल बिजनेस में एमएससी कर रहे छात्र नमन मक्कर इतनी ऊंची कीमतों से जूझ रहे हैं, लेकिन वह अभी भी सब कुछ सही होने की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा "मौजूदा महंगाई दर के साथ, मेरे खर्चों को कम से कम रखना अपने आप में एक चुनौती है। मैं जरूरी चीजों पर ध्यान केंद्रित करता हूं, लेकिन कभी-कभी अपनी क्रेविंग का ख्याल रखने की कोशिश करता हूं, क्योंकि जब आप घर से दूर होते हैं, तो आप खर्च नहीं उठा सकते।