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भारतीय छात्रों के लिए दाखिला फीस नहीं बनेगी बाधा

Wed, 11 Jul 2018 07:24 AM IST
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा पाने वाले संस्थान अपनी मर्जी से फीस तो बढ़ा सकते हैं, लेकिन मेरिट में आने वाले देश के छात्रों को इससे दिक्कत नहीं होगी। दरअसल इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस डीम्ड-टू बी यूनिवर्सिटी रेगुलेशन में ऐसा प्रावधान किया गया है कि संस्थान विदेशी छात्रों से ही अपनी मर्जी से फीस वसूल सकेंगे। 
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खास बात यह है कि आगामी तीन सालों में यह इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस वाले संस्थान परफॉरमेंस में सुधार नहीं करते हैं तो पहले चेतावनी व बाद में स्टेट्स वापस ले लिया जाएगा।  

इंपावर्ड एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन प्रो. एन गोपालस्वामी के मुताबिक, इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा पाने वाले संस्थान फीस तो बढ़ा सकते हैं, लेकिन उसके चलते मेरिट के छात्र को दाखिला देने से इंकार नहीं कर पाएंगे। 
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इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी रेगुलेशन में नियमों को सख्त रखा गया है। ताकि संस्थान अपनी मनमर्जी न कर सकें। कमेटी ऐसे छह संस्थानों पर लगातार नजर रखेगी।
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यूजीसी का दखल व मंजूरी से निजात

संस्थानों में फिलहाल 20 छात्रों पर एक शिक्षक हैं, जोकि पांच सालों तक दस छात्रों पर एक शिक्षक होंगे। टॉप 5 सौ रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी की फैकल्टी का चयन हो सकता है, लेकिन पार्ट टाइम नहीं।   
 
इंस्टीट्यूटऑफ एमिनेंस को नया कोर्स शुरू करने से पहले यूजीसी से मंजूरी नहीं लेनी होगी, बल्कि उन्हें कोर्स डिजाइन, पाठ्यक्रम,क्रेडिट आदि का  फैसला लेने का अधिकार मिल गया  है। यूजीसी उक्त संस्थानों में दखल नहीं देगा। वे अपना 20 फीसदी कोर्स को ऑनलाइन कोर्स में पढ़ायी करवा सकेंगे।  

 
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