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ब्रिटिश रिपोर्ट : भारतीय छात्रों की सफलता का 'मॉडल' बेहतरीन, अपनाने योग्य आदर्श प्रणाली

Wed, 31 Mar 2021 10:06 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

  • कमीशन ऑन रेस एंड एथनिक डिसपैरिटीज की रिपोर्ट
  • भारतीय छात्रों की शैक्षणिक सफलता का मॉडल बेहतरीन 
  • यह अन्य समुदायों में अपनाने योग्य एक आदर्श प्रणाली
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन - फोटो : twitter.com/BorisJohnson
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विस्तार
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ब्रिटेन में एक उच्च स्तरीय आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय छात्रों की शैक्षणिक सफलता का मॉडल बेहतरीन है। यह अन्य समुदायों में अपनाने योग्य एक आदर्श प्रणाली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रणाली पर और अधिक शोध करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय छात्र शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं और इसके फलस्वरूप उनकी औसत आय का स्तर उच्च होता है।

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यह समीक्षा रिपोर्ट ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के निर्देश पर गठित एक नस्लीय एवं जातीय विषमता आयोग ने जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली सफलता का एक ऐसा मॉडल है जिसे अन्य अन्य नस्लीय समुदायों को अपनाना चाहिए। अलग-अलग समुदाय में इसे लेकर अधिक शोध की आवश्यकता है। ब्रिटेन की नस्लीय विषमताओं को लेकर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कमीशन ऑन रेस एंड एथनिक डिसपैरिटीज (नस्लीय एवं जातीय विषमता आयोग) का गठन किया था। इस आयोग की रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई थी।

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रिपोर्ट में कहा गया था कि ब्रिटेन में जीवन के अवसरों पर नस्लीय विषमता का प्रभाव पड़ा है लेकिन यह वर्ग मतभेदों के रूप में कभी उभरा नहीं। मोटे तौर पर देखें तो रिपोर्ट में कहा गया कि ब्रिटेन में भले ही वास्तविकता में नस्लीय भेदभाव को नकारा नहीं जा सकता है, लेकिन अन्य देशों के मुकाबले यह देश अधिक निष्पक्ष है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के शिक्षा सलाहकार डॉ टोनी सेवेल की अध्यक्षता में गठित कमीशन ऑन रेस एंड एथनिक डिसपैरिटीज की रिपोर्ट में स्वीकारा गया है कि भारतीय छात्रों की शैक्षणिक सफलता को पूरे ब्रिटेन में सभी विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए एक अनुकरणीय आदर्श मॉडल के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
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आयोग की केंद्रीय सिफारिशों में बीएएमई (BAME) शब्द जो कि अश्वेत (Black), एशियाई (Asian) और अल्पसंख्यक समुदाय (Minority Ethnic) का द्योतक है, की जगह ब्रिटिश भारतीय जैसे शब्द संदर्भ इस्तेमाल करना भी प्रस्तावित किया गया है। रिपोर्ट में आयोग के द्वारा एकत्र सामाजिक-आर्थिक स्थिति के साक्ष्यों से पता चलता है कि कुछ जातीय समूह जैसे कि अश्वेत अफ्रीकी, भारतीय और बांग्लादेशी छात्र गोरे ब्रिटिश छात्रों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रवासी समुदाय के छात्र अपने देश में काफी संघर्ष और मेहनत के बाद यहां तक पहुंचते हैं और वे यहां आते हीं अपने आप को पढ़ाई के प्रति समर्पित कर देते हैं। बेहतर शिक्षा पाकर वे अपनी आर्थिक और सामाजिक हालात से उबरते हैं। 
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