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भारत-न्यूजीलैंड: शिक्षा जगत में सहयोग बढ़ाएंगे दोनों देश, किन संस्थाओं के बीच हुए समझौते? जानें बड़ी बातें

Sat, 11 Jul 2026 01:53 PM IST
Akash Kumar एएनआई, ऑकलैंड (न्यूजीलैंड)

सार

India-New Zealand: भारत और न्यूजीलैंड ने शिक्षा, रिसर्च और नई तकनीकों में साझेदारी मजबूत करने का फैसला किया है। छात्र एक्सचेंज से लेकर विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग और जलवायु-अनुकूल कृषि तक कई क्षेत्रों पर सहमति बनी। आइए जानते हैं शिक्षा जगत को लेकर दोनों देशों के बीच क्या अहम समझौते हुए हैं।
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भारत-न्यूजीलैंड के बीच शिक्षा को लेकर क्या समझौते हुए? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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India-New Zealand: भारत और न्यूजीलैंड ने शिक्षा, रिसर्च, विज्ञान और नई तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बातचीत में इन क्षेत्रों को दोनों देशों के रिश्तों का अहम हिस्सा बताया गया।

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दोनों नेताओं ने अधिकारियों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत से कृषि, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक, विज्ञान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में नई साझेदारियां बनाने की अपील की।

शिक्षा क्षेत्र में कैसे बढ़ेगा सहयोग?

भारत और न्यूजीलैंड ने माना कि शिक्षा दोनों देशों के बीच लोगों के रिश्तों को मजबूत करने का सबसे बड़ा माध्यम है। इससे छात्रों को नए अवसर मिलेंगे, रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और लंबे समय में आर्थिक सहयोग भी मजबूत होगा। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है-
  • छात्रों के लिए दूसरे देश में पढ़ाई और एक्सचेंज कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
    विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच नई साझेदारियां बनाई जाएंगी।
    रिसर्च और इनोवेशन से जुड़े संयुक्त कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
    कौशल विकास और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।
    2025 में हुए शिक्षा सहयोग समझौते (Education Cooperation Arrangement 2025) को आगे बढ़ाया जाएगा।

किन संस्थाओं और एजेंसियों के बीच समझौता हुआ?

भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और न्यूजीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (NEMA) के बीच एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं।

इस समझौते के तहत दोनों देश आपदा से निपटने की तैयारी, राहत और पुनर्वास के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। साथ ही लोगों और बुनियादी ढांचे को आपदाओं के असर से ज्यादा सुरक्षित बनाने पर भी जोर रहेगा।
 

कृषि और जलवायु पर भी साथ काम करेंगे

दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का मिलकर सामना करने और कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की दिशा में काम करने पर सहमति जताई।

इसके अलावा, टिकाऊ और जलवायु के अनुकूल खेती और खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च और नई तकनीकों पर भी साथ काम करने की बात कही गई।

भारत और न्यूजीलैंड ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (CDRI) के तहत सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में न्यूजीलैंड के शामिल होने का स्वागत भी किया।
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वीजा को लेकर क्या कहा गया?

विदेश मंत्रालय में पूर्वी मामलों के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि वीजा जारी करना न्यूजीलैंड का अधिकार है और इस पर फैसला वही देश करता है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता यह है कि छात्रों, कारोबार और दोनों देशों के बीच होने वाले शैक्षणिक आदान-प्रदान में कोई बाधा न आए।
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