भारत में थीं 500 से भी ज्यादा रियासतें
साल 1947 में जब भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली तो उस वक्त देश कई रियासतों में बंटा हुआ था। ऐसे कई राज्य थे जो उस समय नवगठित भारतीय गणराज्य में शामिल नहीं थे। इन राज्यों पर या तो रियासती शासकों का नियंत्रण था या फिर अंग्रेजों के जाने के बाद उनके पास विकल्प था कि वे अपना भाग्य स्वयं चुनें।
आजादी के समय भारत 500 से भी ज्यादा रियासतों में बंटा हुआ था। इन रियासतों का स्वतंत्र शासन में विश्वास था, जोकि सशक्त भारत के निर्माण में सबसे बड़ी अड़चन थी। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के बाद भारत और पाकिस्तान अस्तित्व में आए और देशी रियासतों के सामने तीन विकल्प रखे गये- पहला यह कि वो भारत में शामिल हो जाएं, दूसरा विकल्प पाकिस्तान में शामिल होने का था और तीसरा था कि वो स्वतंत्र रहें। कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद के अलावा बाकी सभी रियासतों ने स्वेच्छा से भारतीय परिसंघ में शामिल होने का विकल्प चुना।
जूनागढ़ के लोगों की इच्छा थी भारत में रहने की
जूनागढ़ रियासत ने पाकिस्तान में विलय होने की घोषणा की वहीं, कश्मीर ने स्वतंत्र बने रहने की इच्छा जाहिर की थी। 20 फरवरी 1948 को हुए जनमत संग्रह में जूनागढ़ रियासत के 91% लोगों ने भारतीय संघ में शामिल होने की इच्छा रखी। नतीजन जूनागढ़ आज भारत में शामिल है। हालांकि, भोपाल की रियासत भी भारत में शामिल होने को राजी नहीं थी, लेकिन बाद में वह भारत में मिल गयी।
भारतीय संघ में राज्य
स्वतंत्रता पूर्व भारत में ब्रिटिश राज के दौरान 17 प्रांत और 550 से अधिक रियासतें थी। ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता मिलने के बाद ये रियासतें या तो भारतीय संघ या फिर पाकिस्तान में विलय हो गईं। वर्तमान में भारतीय संघ में 28 राज्य और 08 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इनमें 02 जून 2014 को राज्य का दर्जा पाने वाला तेलंगाना सबसे नवीनतम राज्य है।