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Independence Day 2022: कैदियों को ऐसी सजा कि तन्हाई मार देती थी, अंग्रेजों के जुल्म के पांच खौफनाक किस्से

Mon, 15 Aug 2022 05:10 AM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

आइए इस खबर में हम जानते हैं अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के पर किए गए कुछ ऐसे ही जुल्मों के बारे में जिन्हें सुनकर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है।  
 
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सेल्यूलर जेल - फोटो : Social media
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विस्तार
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हमारा देश भारत इस 15 अगस्त, 2022 को अपना 76वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। करीब 200 साल की ब्रिटिश हुकूमत से देश को आजादी दिलाने में अनगिनत भारतवासियों ने अपने हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहूति दे दी थी। आजादी के इस अमृत महोत्सव में पूरा देश उन महापुरुषों को याद कर रहा है जिन्होंने इस देश की स्वतंत्रता में अपना योगदान दिया था। अपने 200 सालों के क्रूर शासन में अंग्रजों ने भारतीयों पर अनगिनतन जुल्म किए थे, जिनसे अनगिनत लोगों ने अपनी जाने गंवाई और कई अपने घरों से जीवन भर के लिए दूर हो गए। आइए इस खबर में हम जानते हैं अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के पर किए गए कुछ ऐसे ही जुल्मों के बारे में जिन्हें सुनकर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है।  

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Azadi Ka Amrit Mahotsav - फोटो : Amar Ujala
काला पानी की सजा
काला पानी की सजा अंग्रेजों के काल की सबसे क्रूर सजाओं में से एक थी। इसे सेल्यूलर जेल के नाम से जाना जाता था। यह जेल भारत की मुख्य भूमि से काफी दूर अंडमान निकोबार द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में बनी हुई है। इसे अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को कैद रखने के लिए बनाया गया था। जेल गहरे समुद्र से घिरी हुई है, जिसके चारों ओर कई किलोमीटर तक सिर्फ और सिर्फ समुद्र का पानी ही दिखता है। यानि की कैदी भाग कर भी कहीं और नहीं जा सकते थे।
यहां कैदियों को कोल्हू का बैल बनाकर तेल निकलवाया जाता था। कैदियों के सेल इतने छोटे हुआ करते थे कि कोई कैदी एक-दूसरे से बात न कर सके। ऐसे में कैदी बिल्कुल अकेले पड़ जाते थे और वो अकेलापन उनके लिए सबसे भयानक होता था। न जाने कितने ही भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान इस जेल में ही गंवा दी। भारतीय इतिहास में काला पानी एक काला अध्याय है। 

Azadi Ka Amrit Mahotsav - फोटो : Amar Ujala
निर्मम हत्याएं
अंग्रजों ने अपने शासन के दौरान भारत में अनगिनत महापुरुषों की हत्या भी की थी। इनमें लाला लाजपत राय और चंद्रशेखर आजाद की हत्या, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को फांसी आदि शामिल हैं। इसके अलावा बैसाखी के दिन जालियांवाला बाग में हजारों लोगों की हत्या के बारे में सुनकर आज भी रूह कांप जाती है। बता दें कि ये हत्याएं केवल 20वीं सदी का शुरुआत में थी। अगर 1857 के विद्रोह या इससे पहले की भी बात करें तो विभिन्न विद्रोह को दबाने के नाम पर अंग्रजों ने अनगिनत लोगों की हत्या की थी।

Azadi Ka Amrit Mahotsav - फोटो : Social Media
बंधुआ मजदूरी
औद्योगिक क्रांति के बाद अंग्रजों ने दुनियाभर में अपने उपनिवेश स्थापित कर लिए थे। उन्हें कई देशों में काम करने वाले लोगों की कमी थी। उस दौरान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अंग्रेज बड़े पैमाने पर भारतीय मजदूरों को विभिन्न उपनिवेशों में ले गए। इन्हें गिरमिटिया मजदूर कहा जाता था। साल 1834 से अंग्रजों ने हजारों-लाखों की संख्या में भारतीय लोगों को गुलाम बनाकर अफ्रीका, फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिडाड जैसे देशों में भेजा गया। मॉरिशस में तो आज भी 60 फीसदी से अधिक आबादी भारतीय लोगों की है। वेस्टइंडीज की क्रिकेट टीम में शिवनारायण चंद्रपॉल जैसे खिलाड़ियों के पूर्वज भी उस दौर में अंग्रजों द्वारा ही ले जाए गए थे। इसलिए इन देशों में आज भी बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं। 

Azadi Ka Amrit Mahotsav - फोटो : Amar Ujala
मानव निर्मित अकाल
साल 1942-43 में बंगाल और ओडिशा क्षेत्र में पड़े अकाल को दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित त्रासदियों में से एक माना जाता है। इस अकाल ने मौजूदा बांग्लादेश, भारत का पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा को अपनी चपेट में लिया था। अलग-अलग अनुमान के मुताबिक करीब 30 लाख भारतीयों ने भूख से तड़प कर अपनी जान गंवा दी थी। शहर के शहर और गाव की गलियों में नर कंकाल के ढ़ेर लग गए थे। इस साल इस क्षेत्र में समुद्री तूफान ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था। हालांकि,ऐसा माना जाता है कि फसल खराब होने के बाद भी देश में बड़े पैमाने पर अनाज उपलब्ध था लेकिन अंग्रजों की क्रूर सत्ता इसका इस्तेमाल दूसरे विश्वयुद्ध के लिए कर रही थी। भारत का अनाज जहाजों में भर-भर कर ब्रिटेन भेजा जा रहा था और भारत के ही लाखों लोग भूख से अपने प्राण गंवा रहे थे। 
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Azadi Ka Amrit Mahotsav - फोटो : Amar Ujala
भारतीय उद्योगों को किया बर्बाद
एक वक्त था जब भारत सूती वस्त्रों के निर्यात में अग्रणी देश हुआ करता था। हालांकि, अंग्रजों की कुटिल नीतियों ने इस उद्योग को बर्बाद कर डाला। अंग्रजों ने भारतीय सामाग्रियों के निर्यात पर भारी कर लाद दिए। वहीं, ब्रिटेन से भारत आयात होने वाले वस्तुओं पर कर या तो कम कर दिया या फिर उन्हें टैक्स फ्री ही कर दिया। इस कारण भारतीय उद्योग धीरे-धीरे बर्बाद होते चले गए। किसानों की जमीनों पर नील की जबरदस्ती ने खेतों को बंजर बना डाला। तो वहीं, अंग्रजों द्वारा लाई गई जमींदारी व्यवस्था और अत्यधिक लगान ने छोटे किसानों से उनकी जमीनें छीन ली। इस कारण समाज में ऊंच-नीच की खाई बहुत ज्यादा बढ़ गई।  
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