कोहिनूर हीरा
आंध्र प्रदेश के कोल्लूर खदान से निकला कोहिनूरl हीरा आज भी दुनिया का सबसे मशहूर हीरा है, जो कि ब्रिटेन की महारानी के मुकुट पर लगा हुआ है। इसका वजन 21.6 ग्राम है और 105.6 मीट्रिक कैरेट का है। वर्तमान में इसे टावर ऑफ लंदन के ज्वेल हाउस में रखा गया है। एक वक्त कोहिनूर मुगल बादशाह के मयूर सिंहासन में लगा हुआ था। इसके बाद यह पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के पास भी रहा था। अंग्रेजों ने इसे लूटकर साल 1849 में इसे ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया था।
टीपू सुल्तान की अंगूठी और तलवार
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टीपू सुल्तान की अंगूठी और तलवार
साल 1799 में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान अंग्रेजों में श्रीरंगपट्टनम का युद्ध हुआ था। इसमें टीपु सुल्तान की हार हुई और उसकी मौत हो गई थी। कहा जाता है कि अंग्रजों ने टीपू की लाश से तलवार और अंगूठी को चुरा लिया था। इसके अलावा भी कई अन्य बेशकीमती चीजें थीस जिन्हें चुराकर अंग्रजों ने ब्रिटेन भेज दिया गया था। कई साल पहले ऐसी खबरें आई थी भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने टीपू की तलवार को खरीद लिया था। हालांकि, अब भी यह निश्चित नहीं हो सका है कि यह तलवार कहां है। टीपू की अंगूठी आज भी ब्रिटेन में है। बता दें कि इस अंगूठी पर देवनागरी लिपि में श्रीराम का नाम लिखा है।
शाहजहां का वाइन कप
मुगल बादशाह शाहजहां के महल में कई बेशकीमती सामान थे। इसी में से एक था बहुमूल्य रत्न Jade (हरिताश्म) से बना उनका वाइन पीने का कप। 19वीं सदी में अंग्रेजों ने अपनी सत्ता आने के बाद इसे भी चोरी-छीपे ब्रिटेन भेज दिया था। जानकारी के मुताबिक 19वीं सदी में कर्नल चार्ल्स सेटन गुथरी ने शाहजहां के इस वाइन कप को चुराकर ब्रिटेन भेज दिया था। इसे साल 1962 से इसे लंदन के विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय में रखा गया है।
सुल्तानगंज बुद्ध की प्रतिमा
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सुल्तानगंज बुद्ध की प्रतिमा
सुल्तानगंज बुद्ध की प्रतिमा अपने-आप में भारतीय वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है। यह 2 मीटर से अधिक लंबा और 500 किलोग्राम से अधिक वजन की है। साल 1862 में रेलवे निर्माण के दौरान एक ब्रिटिश रेलवे इंजीनियर ई.बी.हैरिस को यह मूर्ति खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी। ऐसा माना जाता है कि यह मूर्ति करीब 700 वर्षों तक दफन रही थी। अंग्रजों ने इसे भी चुराकर ब्रिटेन भेज दिया। आज भी सुल्तानगंज बुद्ध की प्रतिमा बर्मिंघम म्यूजियम में रखी हुई है।
अमरावती के मार्बल्स
भारत का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है। हमारी अनेकों धरोहरें या तो लूट ली गईं या फिर वे जमीन के नीचे दबी हैं। समय-समय पर यह चीजें दुनिया के सामने भी आती रहती हैं। इन्हीं में से एक अमरावती के मार्बल्स भी हैं। बेहद चमकदार और अनोखी नक्काशी से लैस ये संगमरमर भी ब्रिटिश लूट ले गए थे। साल 1859 में खुदाई के दौरान ये मूर्तियां अंग्रजों को मिली थी। इन मार्बलों को अंग्रजों ने चोरी-छिपे मद्रास से ब्रिटेन भेज दिया गया था। लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में आज भी इसे देखा जा सकता है। बता दें कि ये केवल कुछ ही वस्तुएं हैं जिनका जिक्र हमने किया है। अंग्रेज इनके अलावा भी भारत से अनगिनत अनोखी चीजों को लूटकर अपने यहां ले गए थे।