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NEP: बिना फंड और इंफ्रास्ट्रक्चर के एनईपी लागू करना नामुमकिन: तमिलनाडु के मंत्री पलानीवेल त्यागराजन

Thu, 13 Mar 2025 02:29 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

TN Minister Palanivel Thiagarajan: तीन-भाषा नीति को लेकर जारी विवाद के बीच, तमिलनाडु के मंत्री पत्तानीवेल त्यागराजन ने नई शिक्षा नीति पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इसे लागू करना संभव नहीं है क्योंकि इसके लिए न तो पर्याप्त फंडिंग है और न ही जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध है।  
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NEP - फोटो : ANI
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विस्तार
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NEP: तीन-भाषा नीति को लेकर उठे विवाद के बीच, तमिलनाडु के मंत्री पत्तानीवेल त्यागराजन ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू करना असंभव है क्योंकि इसके समर्थन के लिए कोई फंडिंग या बुनियादी ढांचा नहीं है।

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नई शिक्षा नीति की आलोचना करते हुए त्यागराजन ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 एक "एलकेजी छात्र" और एक "उच्च शिक्षा छात्र" को एक ही तरह से पढ़ाने जैसा है।

तीन-भाषा नीति पर विवाद के बीच तमिलनाडु मंत्री का बड़ा बयान

उन्होंने आगे दावा किया कि 1968 के बाद शुरू की गई शिक्षा नीतियों में दक्षिण भारतीय भाषाएं सीखने की सिफारिश की गई थी। हालाँकि, योग्य शिक्षकों की कमी के कारण, यह नीति 20 वर्षों के भीतर हिंदी भाषी राज्यों में विफल हो गई।

बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए, मंत्री पलानीवेत त्यागराजन ने कहा, "1968 के बाद शुरू की गई शिक्षा नीतियों में दक्षिण भारतीय भाषाओं को सीखने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, योग्य शिक्षकों की कमी के कारण, यह नीति 20 वर्षों के भीतर हिंदी भाषी राज्यों में विफल हो गई। 

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यहां तक कि उत्तर प्रदेश में भी वे तीन-भाषा नीति को पूरी तरह से लागू नहीं कर सके। फिर भी, उन्होंने पीएम-श्री निधि को रोक दिया है और उपद्रवियों की तरह आक्रामक तरीके से बोलना जारी रखा है। एनईपी 2020 एक एलकेजी छात्र और एक उच्च शिक्षा छात्र को समान रूप से पढ़ाने जैसा है। नई शिक्षा नीति को लागू करना आज असंभव है क्योंकि इसका समर्थन करने के लिए कोई धन या बुनियादी ढांचा नहीं है।"

बीजेपी नेता अन्नामलाई ने मंत्री पर साधा निशाना

भाजपा तमिलनाडु के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने तीन भाषा नीति पर अपने बयान के लिए मंत्री पत्तानीवेत त्यागराजन की आलोचना की। यह दावा करते हुए कि उनके अपने बेटों ने अंग्रेजी और एक विदेशी भाषा का अध्ययन किया है, अन्नामलाई ने उनसे पूछा कि वे नीति के कार्यान्वयन को रोकने के लिए "नाटक" क्यों कर रहे हैं। तीन भाषा नीति का बचाव करते हुए अन्नामलाई ने कहा कि यह राष्ट्रीय नीति सरकारी स्कूल के छात्रों को तमिल और अंग्रेजी के साथ-साथ तीसरी भारतीय भाषा या उच्च स्तर पर एक विदेशी भाषा सीखने का अवसर प्रदान करेगी।  

मैं यह बताना भूल गया कि वे कौन सी दो भाषाएं थीं। उनके बेटों ने जो दो भाषाएं सीखीं, पहली भाषाः अंग्रेजी दूसरी भाषाः फ्रेंच/स्पैनिश क्या यह आपकी द्विभाषी नीति है? हम एक ऐसी राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मांग कर रहे हैं जो हमारे सरकारी स्कूल के छात्रों को तमिल और अंग्रेज़ी के साथ-साथ तीसरी भारतीय भाषा या उच्च स्तर पर एक विदेशी भाषा सीखने का अवसर प्रदान करे। इसे रोकने के लिए यह सब नाटक क्यों? में ईमानदारी से अपने भाई पीटीआर और उनके दोनों बेटों को जीवन में सर्वश्रेष्ठ की कामना करता हूं। हम मांग करते हैं कि उन्हें जो कई भाषाएं सीखने का अवसर मिला है, वह हमारे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और जरूरतमंद बच्चों को भी मिलना चाहिए।"

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मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का केंद्र पर तीखा हमला

इससे पहले बुधवार को, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति ( एनईपी) को भारत के विकास के बजाय हिंदी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक "भगवा नीति" करार दिया, आरोप लगाया कि नीति तमिलनाडु की शिक्षा प्रणाली को नष्ट करने की धमकी देती है।

हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि एनईपी का उद्देश्य बहुभाषावाद और भाषा शिक्षा में लचीलेपन को बढ़ावा देना है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हिंदी थोपने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि नीति राज्यों को अपनी भाषा चुनने की अनुमति देती है। 

केंद्र सरकार ने किया NEP का बचाव

मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके सरकार को त्रिभाषा नीति और एनईपी पर चुनौती दी उन्होंने एक्स पर लिखा, "मैं संसद में दिए गए अपने बयान पर कायम हूं और तमिलनाडु स्कूल शिक्षा विभाग का 15 मार्च 2024 का सहमति पत्र साझा कर रहा हूं। डीएमके सांसद और माननीय सीएम जितना चाहें झूठ का ढेर लगा सकते हैं, लेकिन जब सच टूटकर गिरता है तो वे खटखटाने की जहमत नहीं उठाते। माननीय सीएम स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार को तमिलनाडु के लोगों को बहुत कुछ जवाब देना है। भाषा के मुद्दे को ध्यान भटकाने की रणनीति के रूप में उठाना और अपनी सुविधा के अनुसार तथ्यों को नकारना उनके शासन और कल्याण घाटे को नहीं बचा पाएगा।"

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