मॉर्फिंग स्किन तकनीक स्टॉल के खतरे को करेगी कम
एरोडायनामिक स्टॉल तब होता है, जब विमान के पंखों के ऊपर से गुजरने वाली हवा का प्रवाह बिगड़ जाता है। इससे विमान को ऊपर उठाने वाली ताकत (लिफ्ट) अचानक कम हो जाती है और हवा का प्रतिरोध (ड्रैग) बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में विमान के लिए हवा में बने रहना मुश्किल हो सकता है।
IIT मद्रास की नई मॉर्फिंग स्किन तकनीक इसी समस्या का समाधान पेश करती है। इसमें पंखों पर एक लचीली परत लगाई जाती है, जो जरूरत पड़ने पर अपना आकार बदल लेती है। इससे हवा का प्रवाह पंखों से जुड़ा रहता है और विमान को स्टॉल होने से बचाने में मदद मिलती है। यह तकनीक विमान को ज्यादा स्थिर और सुरक्षित बना सकती है।
इसका इस्तेमाल खास तौर पर वाणिज्यिक विमानों में किया जा सकता है। इससे छोटे या व्यस्त रनवे पर टेक-ऑफ और लैंडिंग को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा। साथ ही, यह तकनीक विमान की ईंधन खपत कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में भी मदद कर सकती है।
क्या नई मॉर्फिंग स्किन विमान को स्टॉल होने से बचा पाएगी?
ये नतीजे 'यूरोपियन जर्नल ऑफ मैकेनिक्स - B/फ्लुइड्स' (https://doi.org/10.1016/j.euromechflu.2025.204348) में पब्लिश हुए। यह एल्सेवियर का एक पीयर-रिव्यूड जर्नल है जो फ्लुइड मैकेनिक्स के सभी क्षेत्रों में थ्योरेटिकल, कंप्यूटेशनल और एक्सपेरिमेंटल रिसर्च पब्लिश करता है। इस पेपर को डॉ. अरित्रस रॉय और डॉ. रिंकू मुखर्जी ने मिलकर लिखा है।
IIT मद्रास के एप्लाइड मैकेनिक्स और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुखर्जी ने PTI को बताया, "हमारी रिसर्च एक ऐसी आम जिज्ञासा पर आधारित है कि पक्षी शायद ही कभी 'स्टॉल' (हवा में अचानक लिफ्ट खो देना) करते हैं, जबकि उनसे प्रेरित होने के बावजूद एयरक्राफ्ट ऐसा करते हैं।"
टीम ने इंजीनियरिंग और स्मार्ट मटीरियल का इस्तेमाल करके प्रकृति की अनुकूलन क्षमता (adaptability) की नकल करते हुए इस अंतर को पाटा। मुखर्जी ने आगे बताया कि यह सिस्टम प्रेडिक्टिव कंप्यूटेशनल मॉडल को असल दुनिया के विंड टनल वैलिडेशन के साथ जोड़ता है, और इसमें मैक्रो फाइबर कम्पोजिट (MFC) स्ट्रिप्स भी शामिल हैं जो रियल टाइम में आकार में बदलाव को महसूस कर सकती हैं और उन्हें लागू कर सकती हैं।
मुश्किल परिस्थितियों में कैसे काम करेगी मॉर्फिंग स्किन?
डॉ. रिंकू मुखर्जी ने बताया कि जब कोई विमान उड़ान भरता है, तो उसे जमीन से ऊपर उठने के लिए अतिरिक्त लिफ्ट की जरूरत होती है। खराब मौसम या दूसरी प्रतिकूल परिस्थितियों में यह काम और मुश्किल हो सकता है। ऐसे समय में यह नया मॉर्फिंग स्किन सिस्टम पंखों के बाहरी हिस्से का आकार बदल लेता है और अतिरिक्त लिफ्ट पैदा करने में मदद करता है। इससे विमान हवा में स्थिर बना रहता है और दुर्घटना का खतरा कम हो सकता है।
शुरुआती परीक्षणों में इस तकनीक के अच्छे नतीजे मिले हैं। यह न केवल हवा के प्रवाह को पंखों से अलग होने से रोकती है, बल्कि विमान की लिफ्ट भी बढ़ाती है और घर्षण कम करती है। इससे उड़ान अधिक सुरक्षित हो सकती है और ईंधन की बचत भी हो सकती है। साथ ही, खराब मौसम, पक्षियों के टकराने के खतरे या तकनीकी खराबी जैसी परिस्थितियों में पायलट को विमान पर बेहतर नियंत्रण मिल सकता है।
डॉ. मुखर्जी के अनुसार, इस तकनीक पर पिछले 20 वर्षों से काम किया जा रहा है। शोधकर्ताओं ने इसे प्रयोगों और परीक्षणों के जरिए सफलतापूर्वक साबित किया है और इसका पेटेंट भी करा लिया है। अब टीम इसे वास्तविक विमानों में इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।