IIT Bombay Sahil Wakode Death Case: आईआईटी बॉम्बे के बीटेक छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की 18 सितंबर को हुई मौत के बाद मामला लगातार नए सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और चैटजीपीटी के कथित इस्तेमाल का मामला सामने आया, तो दूसरी ओर परिवार ने जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना के आरोप लगाए। इसके बाद कैंपस में छात्रों का विरोध शुरू हुआ, प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई और जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
अब जांच का एक अहम हिस्सा परीक्षा हॉल और हॉस्टल की सीसीटीवी फुटेज बन गई है। पुलिस 18 सितंबर को हुई घटनाओं की कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है। इसी बीच आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर डूला को छुट्टी पर भेज दिया है और मामले की आंतरिक जांच के लिए 10 सदस्यीय हाईलेवल कमेटी भी बनाई है। आइए 18 सितंबर से 23 सितंबर तक पूरे घटनाक्रम को क्रम से समझते हैं।
18 सितंबर: परीक्षा के दौरान क्या हुआ?
साहिल वाकोडे आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र थे। 18 सितंबर को उनकी मिड-सेमेस्टर परीक्षा थी। आईआईटी बॉम्बे के शुरुआती बयान के मुताबिक, परीक्षा के दौरान साहिल के पास मोबाइल फोन होने और कथित तौर पर चैटजीपीटी के जरिए सवालों के जवाब लेने की बात सामने आई थी।
संस्थान ने बाद में अपने इसी शुरुआती बयान पर माफी मांगी। आईआईटी बॉम्बे ने कहा कि घटना से पहले की परिस्थितियां अभी जांच के अधीन हैं और जांच पूरी होने से पहले इन घटनाओं का विवरण या उनका चरित्रांकन करना उचित नहीं था। इसलिए परीक्षा में वास्तव में क्या हुआ था, इसे लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
परीक्षा के बाद क्या हुआ, सीसीटीवी में क्या दिखा?
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 18 सितंबर की परीक्षा से जुड़े CCTV फुटेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की। जांच के मुताबिक, दोपहर करीब 12:30 से 12:45 बजे के बीच साहिल परीक्षा हॉल में दिखाई दिए। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के अनुसार, इस दौरान प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने उनसे पूछताछ की और बाद में उन्हें दूसरे छात्रों से अलग ले जाया गया। इसके बाद साहिल परीक्षा हॉल से बाहर निकलते दिखाई दिए।
इसके बाद क्राइम ब्रांच ने परीक्षा हॉल से लेकर कैंपस और हॉस्टल तक की CCTV फुटेज को जोड़कर उनकी गतिविधियों की टाइमलाइन तैयार करना शुरू किया। जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, साहिल करीब 1:25 बजे अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचे। इसके बाद वे कमरे से बाहर निकलते दिखाई नहीं दिए। उसी शाम उनके कमरे में उनकी मौत की जानकारी सामने आई।
यहीं से जांच का सबसे अहम सवाल सामने आता है कि परीक्षा हॉल की घटना और साहिल की मौत के बीच क्या-क्या हुआ? पुलिस इसी कड़ी को समझने के लिए सीसीटीवी, मोबाइल और गवाहों के बयानों की जांच कर रही है।
आईआईटी बॉम्बे के पवई परिसर में प्रदर्शन करते छात्र
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
19 सितंबर: मौत के बाद कैंपस में शुरू हुआ विरोध
18 सितंबर की घटना के अगले दिन कैंपस में छात्रों का विरोध शुरू हो गया। छात्रों ने प्रशासन से घटना की पूरी जानकारी, जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की। विरोध के दौरान कैंपस में पुलिस की तैनाती भी की गई।
इसी बीच साहिल के परिवार ने भी संस्थान और उससे जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। परिवार का कहना था कि साहिल को कथित तौर पर जातिगत टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था। इन आरोपों को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
आईआईटी बॉम्बे में क्या हुआ?
- फोटो : Amar Ujala
प्रोफेसर डूला के खिलाफ एफआईआर
परिवार की शिकायत के बाद पवई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ मामला दर्ज किया। एफआईआर में आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 और एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून की संबंधित धाराएं लगाई गईं। बाद में जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
20 सितंबर: परिवार के आरोप बनाम संस्थान का पक्ष
मामले में एक तरफ साहिल के परिवार ने जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना के आरोप लगाए। परिवार का कहना है कि साहिल ने उन्हें अपने साथ कथित जातिगत टिप्पणियों और अपमानजनक व्यवहार के बारे में बताया था।
दूसरी तरफ, आईआईटी बॉम्बे से जुड़े फैकल्टी प्रतिनिधियों ने कहा कि साहिल ने हाल के समय में संस्थान के एससी/एसटी सेल के सामने ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी। इस तरह मामले में परिवार और संस्थान से जुड़े पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
छात्रों ने रखीं 18 मांगें
विरोध के दौरान छात्रों ने प्रशासन के सामने 18 सूत्री मांगपत्र रखा। इसमें स्वतंत्र जांच, प्रशासन की जवाबदेही, छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं में बदलाव जैसी मांगें शामिल थीं।
छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध कथित परीक्षा अनियमितता को सही ठहराने के लिए नहीं है। उनका कहना था कि वे संस्थान की व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठा रहे हैं।
आईआईटी बॉम्बे छात्र आत्महत्या मामला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
21 सितंबर: प्रोफेसर डूला को डीन पद से हटाया गया
21 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को डीन (एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स) के पद से हटा दिया। हालांकि, उस समय उन्हें फैकल्टी सदस्य के पद से नहीं हटाया गया था। आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर किए जाने की बात कही गई। इसी दौरान छात्रों की मांगों पर संस्थान के स्तर पर बातचीत भी हुई और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की विशेष बैठक बुलाई गई।
निदेशक शिरीष केदारे के इस्तीफे की हुई थी मांग
विरोध के बीच आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष बी. केदारे के इस्तीफे की खबरें भी सामने आईं। संस्थान ने इसे साफ तौर पर गलत बताया और कहा कि निदेशक ने इस्तीफा नहीं दिया है। डीन को पद से हटाए जानें पर छात्रों ने असंतोष जताते हुए कहा कि संस्थान निदेशक और डीन डूला को इस्तीफा देना ही होगा। हालांकि, निदेशक केदारे ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।
शुरुआती बयान पर आईआईटी बॉम्बे ने मांगी माफी
21 सितंबर को ही संस्थान ने अपने शुरुआती बयान को लेकर माफी मांगी। आईआईटी बॉम्बे ने कहा कि साहिल की मौत से पहले हुई घटनाओं की परिस्थितियां जांच के अधीन हैं और जांच पूरी होने से पहले उन घटनाओं को निश्चित रूप में पेश करना उचित नहीं था।
22 सितंबर: जांच का फोकस सीसीटीवी पर
- 22 सितंबर तक मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण हो गई। क्राइम ब्रांच परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल की फुटेज को जोड़कर 18 सितंबर के घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन तैयार करने में जुटी थी।
- पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा हॉल में साहिल और प्रोफेसर डूला के बीच क्या बातचीत हुई, इसके बाद साहिल कहां गए और हॉस्टल पहुंचने तक उनकी गतिविधियां क्या रहीं।
- जांच में छात्रों के बयान भी अहम हैं। पुलिस उन छात्रों से पूछताछ कर रही है जो परीक्षा के दौरान वहां मौजूद थे, ताकि सीसीटीवी में दिख रहे घटनाक्रम और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का मिलान किया जा सके।
मोबाइल और डिजिटल सबूत भी जांच का हिस्सा
क्राइम ब्रांच ने साहिल के मोबाइल फोन से जुड़े डिजिटल सबूतों की भी जांच शुरू की है। रिपोर्टों के मुताबिक, फोन का तकनीकी और फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि फोन में ऐसी कोई जानकारी या बातचीत है या नहीं, जो 18 सितंबर के घटनाक्रम को समझने में मदद कर सके।
परिवार के बयान भी जांच का हिस्सा बने। साहिल के माता-पिता ने क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से मुलाकात कर निष्पक्ष और पूरी जांच की मांग की। उन्होंने अपने आरोपों से जुड़ी जानकारी पुलिस के सामने रखी।
पढ़ाई में अच्छा था साहिल: पिता ने क्या कहा?
साहिल को 10वीं में 90% और 12वीं में 76% अंक मिले थे। यहां तक कि आईआईटी बॉम्बे के पहले वर्ष उसने 8.5 सीजीपीए हासिल किया था। ऐसे में परीक्षा में स्मार्ट फोन के इस्तेमाल की बात परिजनों के गले नहीं उतर रही। पिता रवींद्र वकोडे ने कहा, साहिल ने बताया था कि प्रो. डूला उसे तीन माह से परेशान कर रहे थे। जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते थे। इस बयान के कारण पुलिस ने डूला एससी-एसटी एक्ट की धाराएं लगाई हैं।
आईआईटी बॉम्बे छात्र आत्महत्या मामला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
23 सितंबर: प्रोफेसर डूला छुट्टी पर भेजे गए
23 सितंबर को मामले में एक और बड़ा संस्थागत कदम उठाया गया। आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को जांच के बीच छुट्टी पर भेज दिया। इससे पहले उन्हें डीन (एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स) के पद से हटाया गया था। मामले में पुलिस और संस्थान दोनों स्तर पर जांच जारी है।
10 सदस्यीय हाईलेवल कमेटी बनी
आईआईटी बॉम्बे ने मामले की आंतरिक जांच के लिए 10 सदस्यीय हाईलेवल कमेटी गठित की। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समिति संस्थान के बोर्ड की ओर से बनाई गई है और मामले की परिस्थितियों की जांच करेगी। समिति में छात्रों और अन्य विशेषज्ञ सदस्यों को भी शामिल किया गया है।
समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। यानी अब पुलिस जांच के साथ-साथ संस्थान की आंतरिक जांच भी तय समयसीमा के साथ आगे बढ़ेगी।
क्राइम ब्रांच अब किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
फिलहाल जांच का केंद्र कुछ अहम सवाल हैं-
- परीक्षा हॉल में 18 सितंबर को वास्तव में क्या हुआ था?
- साहिल और प्रोफेसर डूला के बीच उस दौरान क्या बातचीत हुई?
- परीक्षा हॉल से निकलने के बाद साहिल कहां गए और किन लोगों के संपर्क में आए?
- हॉस्टल पहुंचने तक की उनकी पूरी गतिविधि क्या रही?
- परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना के आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य मिलते हैं?
- मोबाइल और अन्य डिजिटल सबूतों से क्या जानकारी सामने आती है?
- परीक्षा से जुड़ी संस्थान की निर्धारित प्रक्रिया क्या थी और उस दिन उसका पालन किस तरह हुआ?
मुंबई पुलिस ने कहा है कि जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और लोगों को बिना पुष्टि की जानकारी फैलाने से बचना चाहिए।
अभी मामला किस मोड़ पर है?
- 23 सितंबर तक तस्वीर यह है कि मामले में पुलिस जांच और संस्थान की आंतरिक जांच दोनों चल रही हैं।
- फिर से नियमित कक्षाएं शुरू हो गई हैं और परिसर में फिलहाल कोई प्रदर्शन नहीं हो रहा है।
- क्राइम ब्रांच सीसीटीवी, डिजिटल सबूत और गवाहों के बयानों के आधार पर 18 सितंबर की घटनाओं की कड़ी जोड़ रही है।
- आईआईटी बॉम्बे की 10 सदस्यीय समिति को एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देनी है। प्रोफेसर डूला छुट्टी पर हैं और उनके खिलाफ दर्ज आरोपों की जांच जारी है।