कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला?
सूर्यनारायण दूल्ला आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर हैं। वह साल 2009 से आईआईटी बॉम्बे से जुड़े हुए हैं। संस्थान में आने से पहले भी वह शिक्षा और उद्योग से जुड़े अलग-अलग संस्थानों में काम कर चुके हैं।
उनकी पढ़ाई इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और पावर सिस्टम के क्षेत्र में हुई है। उन्होंने साल 2000 में नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद साल 2002 में आईआईटी बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री ली।
साल 2007 में उन्होंने आईआईटी दिल्ली से पावर सिस्टम्स में पीएचडी पूरी की। इसके बाद साल 2009 में वह आईआईटी बॉम्बे से जुड़ गए।
आईआईटी बॉम्बे से पहले कहां काम किया?
आईआईटी बॉम्बे आने से पहले प्रोफेसर दूल्ला ने अकादमिक संस्थानों के साथ-साथ उद्योग जगत में भी काम किया। वह बेंगलुरु की पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स से जुड़े रहे। इसके अलावा उन्होंने हैदराबाद की मशीन टू मशीन में भी काम किया।
उनका जुड़ाव आईआईटी दिल्ली, एलुरु के सीआरआर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और काकीनाडा के जेएनटीयू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से भी रहा है।
आईआईटी बॉम्बे में निभाईं कई जिम्मेदारियां
आईआईटी बॉम्बे आने के बाद प्रोफेसर दूल्ला ने केवल पढ़ाने और रिसर्च का काम नहीं किया, उन्होंने संस्थान में कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालीं। साल 2011 में वह हॉस्टल-6 के एसोसिएट वार्डन बने। इसके बाद 2012 से 2021 तक उन्होंने इसी हॉस्टल के वार्डन की जिम्मेदारी संभाली।
मार्च 2023 से वह आईआईटी बॉम्बे में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स की जिम्मेदारी निभा रहे थे। जेईई एडवांस्ड 2022 के आयोजन में वह ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन भी रहे। इसके अलावा 2020 और 2021 में वह जेईई एडवांस्ड, यूसीईईडी और सीईईडी से जुड़े आयोजनों में वाइस चेयरमैन की भूमिका में रहे।
रिसर्च का क्षेत्र क्या है?
प्रोफेसर दूल्ला का शोध मुख्य रूप से बिजली और आधुनिक पावर सिस्टम से जुड़ा है। उनके शोध के प्रमुख क्षेत्रों में स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड और एक्टिव डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क शामिल हैं।
वह पावर इलेक्ट्रॉनिक कन्वर्टर कंट्रोल, डिस्ट्रीब्यूटेड एनर्जी रिसोर्सेज को बिजली के ग्रिड से जोड़ने, रियल टाइम सिमुलेशन और इनवर्टर आधारित एक्टिव डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर भी काम करते हैं। उनके काम में आधुनिक बिजली नेटवर्क और ऊर्जा प्रणालियों से जुड़े कई विषय शामिल रहे हैं।
क्यों चर्चा में प्रोफेसर दूल्ला का नाम?
प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला का नाम आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद चर्चा में आया। साहिल जिस परीक्षा में शामिल हुए थे, उसमें डूला इनविजिलेटर थे। आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, साहिल पर परीक्षा के सवालों को मोबाइल से चैटजीपीटी पर डालकर जवाब लेने का आरोप था। इसके बाद साहिल के परिवार ने प्रोफेसर डूला पर जातिगत टिप्पणी, मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने के आरोप लगाए। शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस ने मामला दर्ज किया है और इसकी जांच जारी है। मामले के बीच आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर डूला की डीनशिप निलंबित कर दी है।
कौन हैं आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष बी. केदारे?
प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे आईआईटी बॉम्बे के निदेशक हैं। उनका इस संस्थान से संबंध कई दशकों पुराना है। वह खुद भी आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र रहे हैं और वर्तमान में इसी संस्थान के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर हैं।
उन्होंने साल 1985 में आईआईटी बॉम्बे से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद साल 1992 में इसी संस्थान से पीएचडी पूरी की।
कब बने आईआईटी बॉम्बे के निदेशक?
प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे ने 6 मई 2024 को आईआईटी बॉम्बे के निदेशक का पद संभाला। उन्होंने प्रोफेसर सुभासिस चौधरी की जगह यह जिम्मेदारी ली। निदेशक बनने से पहले भी वह संस्थान में पढ़ाई, शोध और प्रशासन से जुड़े कई काम कर चुके थे। नवंबर 2019 से वह आईआईटी बॉम्बे के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ऑयल, गैस एंड एनर्जी के प्रोफेसर-इन-चार्ज रहे।
वह आईआईटी मद्रास के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में भी रह चुके हैं। इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय के तहत काउंसिल ऑफ आईआईटी में नामित सदस्य के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
उद्योग जगत से भी जुड़ा रहा अनुभव
प्रोफेसर केदारे का अनुभव केवल शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं रहा है। वह ओएनजीसी में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने क्लिक्स डेवलपमेंट्स लिमिटेड में डायरेक्टर (आरएंडडी) की जिम्मेदारी भी संभाली है।
रिसर्च का क्षेत्र क्या है?
प्रोफेसर केदारे का अकादमिक और शोध कार्य मुख्य रूप से अक्षय ऊर्जा, सौर तकनीक और टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों से जुड़ा है। उनके शोध क्षेत्रों में थर्मल एनर्जी स्टोरेज वाली सौर तकनीक, भारतीय उद्योगों से कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अक्षय ऊर्जा समाधान, ऊर्जा बदलाव से जुड़े रास्ते और लोगों की भागीदारी से तकनीक विकसित करना शामिल हैं।
उन्होंने सौर तापीय प्रणालियों के विकास पर भी काम किया है। इनमें ‘अरुण’ सोलर कंसंट्रेटर शामिल है, जिसे औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए गर्मी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
शोध और उपलब्धियों का रिकॉर्ड
प्रोफेसर केदारे के नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्र हैं। उन्होंने विभिन्न सम्मेलनों में भी शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। उनके नाम पेटेंट और कई पुरस्कार भी हैं।
आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, उन्होंने पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है। इसके अलावा 90 से अधिक स्नातकोत्तर शोध परियोजनाओं का भी मार्गदर्शन किया है। उन्हें डॉ. पी.के. पटवर्धन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट अवॉर्ड और विभागीय उत्कृष्ट शिक्षण पुरस्कार समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।
क्यों चर्चा में निदेशक का नाम?
छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद संस्थान में विरोध प्रदर्शन बढ़ गया। प्रदर्शन कर रहे छात्र निदेशक प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे के इस्तीफे की मांग भी कर रहे थे। संस्थान के छात्रों ने 18 मांगों वाला पत्र प्रशासन को सौंपा, जिसमें स्वतंत्र जांच, छात्र कल्याण और अनुशासन व्यवस्था में बदलाव जैसी मांगें शामिल थीं। प्रोफेसर केदारे ने इस मांग पत्र पर हस्ताक्षर किए।