1995 में शुरू हुआ सफर
प्रिया नायर का जन्म 31 मार्च, 1972 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ। उनके पिता सुकुमार विश्वनाथ नायर थे, जिनका अब निधन हो चुका है, जबकि उनकी मां डॉ. सुधा सुकुमार नायर पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने मुंबई के सिडेनहैम कॉलेज से बीकॉम और सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट, पुणे से एमबीए किया।
1995 में उन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) में अपने कॅरिअर की शुरुआत की और डव, रिन, एक्स व पेप्सोडेंट जैसे ब्रांड्स की मार्केटिंग में अहम भूमिका निभाई। प्रिया ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम को भी पूरा किया है। उनके पति मनमोहन नायर बिजनेसमैन हैं और उनकी एक बेटी, महक है।
फील्ड से सीखी मार्केटिंग की बारीकियां
होम केयर डिवीजन की जिम्मेदारी संभालते हुए प्रिया नायर ने सिर्फ लैब रिपोर्ट्स पर भरोसा नहीं किया। वह गांवों में जाकर उपभोक्ताओं की जरूरतों और उनकी रोजमर्रा की चुनौतियों को करीब से समझती थीं, जिसके आधार पर 'कम पानी में ज्यादा सफाई' वाला फॉर्मूला सफल हुआ। उन्हें भारत में फैब्रिक सॉफ्टनर श्रेणी को लोकप्रिय बनाने और 'लक्मे' को डिजिटल जेनरेशन के हिसाब से री-ब्रांड करने का भी श्रेय दिया जाता है।
30 साल का सफर, एक ही कंपनी के साथ
प्रिया नायर ने करीब 30 वर्षों तक हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) में काम किया। एंट्री-लेवल मैनेजर के रूप में शुरुआत कर वह अपनी मेहनत और नेतृत्व क्षमता के दम पर सीईओ बनीं। वह उपभोक्ताओं की जरूरतों को समझने पर जोर देती हैं, इसलिए उन्हें 'कंज्यूमर फर्स्ट लीडर' कहा जाता है। एचयूएल से पहले वह यूनिलीवर की ग्लोबल चीफ मार्केटिंग ऑफिसर और ब्यूटी एंड वेलबीइंग की ग्लोबल प्रेसिडेंट भी रहीं, जहां उन्होंने अरबों यूरो के कारोबार का नेतृत्व किया।
लंदन का 'कल्चरल शॉक' व भारतीय जड़ें
जब प्रिया यूनिलीवर के वैश्विक मुख्यालय (लंदन) पहुंचीं, तो वहां काम करने का तरीका काफी फॉर्मल और डाटा-ओरिएंटेड था। प्रिया ने 'डाटा विथ एम्पैथी' के जरिये अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने बोर्ड मीटिंग्स में सिर्फ ग्राफ दिखाने के बजाय उपभोक्ताओं की असल कहानियां सुनाईं, जिससे उनके फैसले ज्यादा असरदार साबित हुए। उनके सहयोगियों के अनुसार, प्रिया नई-नई जिम्मेदारियां और चुनौतियां लेने से कभी पीछे नहीं हटतीं, इसलिए उन्हें कई लोग 'कॉरपोरेट एथलीट' भी कहते हैं।
25 साल नौकरी, फिर पढ़ाई
प्रिया नायर 'लाइफलॉन्ग लर्निंग' में गहरा विश्वास रखती हैं। करीब 25 साल कॉरपोरेट जगत में बिताने के बाद भी उन्होंने अपनी मां के प्रोत्साहन पर हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के लीडरशिप प्रोग्राम में दाखिला लिया। दिलचस्प बात यह है कि इसी समय उनकी बेटी भी विश्वविद्यालय में कदम रखने जा रही थीं। उनकी मां आज भी मुंबई में कम शुल्क पर क्लिनिक चलाती हैं, जबकि उनकी बहन टाटा मेमोरियल अस्पताल में कैंसर सर्जन हैं। प्रिया कई बार कह चुकी हैं कि उनकी मां उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।
पेंटिंग और सिनेमा की शौकीन
कॉरपोरेट जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद प्रिया नायर को पेंटिंग (चित्रकारी) करना और कैनवास पर रंग बिखेरना बेहद पसंद है। इसके अलावा, वह बिजनेस और लीडरशिप की किताबें पढ़ने और सिनेमा की शौकीन हैं। उन्हें पॉडकास्ट सुनना, खासकर राज शमानी के पॉडकास्ट पसंद हैं। कला और सिनेमा से प्रिया नायर को इंसानी सोच और कहानियों को समझने में मदद मिलती है, जो मार्केटिंग में काम आती है। कूनूर में उनका पसंदीदा स्थान ‘कैफे कॉफी बीन’ है।