रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो)
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‘स्टडी इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के लिए विदेशी छात्रों के साथ-साथ विदेश में पढ़ाई कर रह रहे या इसकी योजना बना रहे भारतीय छात्रों को भी जोड़ा जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ‘स्टे इन इंडिया और स्टडी इन इंडिया’ का नारा दिया है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन प्रोफेसर डीपी सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। तकनीकी संस्थानों के फैसले एआईसीटीई चेयरमैन अनिल सहस्रबुद्धे करेंगे। कमेटी 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। इसके आधार पर गाइडलाइन बनेगी।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि कमेटी छात्रों को भारत में रोकने को लेकर एक गाइडलाइन तैयार करेगी। नंबर वन यूनिवर्सिटी में छात्रों की संख्या बढ़ाने, मल्टी डिसिप्लिनरी और इनोवेटिव प्रोग्राम शुरू करने की भी योजना है।
एचआरडी राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने कहा कि हमें इस बात को जानने की जरूरत है कि आखिर छात्र विदेश में पढ़ाई के लिए क्यों जाते हैं। भारत में विदेश जैसी गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने के रास्ते तलाशने होंगे।
इन पर रहेगा फोकस
ज्वाइंट डिग्री प्रोग्राम, क्रॉस कंट्री डिजाइनिंग सेंटर, विदेश के मशहूर शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन लेक्चर, अकादमिक और व्यापार जगत को लिंक करना, ज्वाइंट डिग्री वेंचर, भारतीय उच्च संस्थानों में लैटरल एंट्री देने पर बात होगी।