आदत एक दिन में नहीं बनती तो एक दिन में छूटती भी नहीं है। बुरी आदत को छोड़ने की अच्छी आदत डालने में न केवल वक्त लगता है बल्कि लगातार सुधार की प्रक्रिया का चलते रहने भी बहुत जरूरी है। कायजन (Kaizen) के इसी सिद्धांत का पाठ हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड कम्प्यूटर्स स्ट्डीज के डायरेक्टर डॉक्टर नवीन गुप्ता ने अपने छात्रों को पढ़ाया और जीवन में सुधार की प्रक्रिया लगातार जारी रखने की सीख दी।
काइजेन एक जैपनीज वर्ड है, जिसे अंग्रेजी में शामिल किया गया है। शब्द से बढ़कर कायजन एक टर्म के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। जीवन में नए बदलाव के लिए Kaizen Technique को भी दुनियाभर में काफी माना जाता है। इस टेक्नीक की मदद से बड़े ही छोटे-छोटे तरीकों से बड़े-बड़े बदलाव संभव हो पाते हैं। हम सब जानते हैं कि जापान के लोग कितने कर्मठ और निरंतर आधुनिकता की ओर प्रयास करने वाले होते हैं।
उसी देश की मिट्टी से निकले से इस एक शब्द में जीवन का सार समाया है। जीवन के इसी सार को डॉक्टर नवीन गुप्ता ने अपने छात्रों को समझाया, क्योंकि वे नई यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं। डॉक्टर गुप्ता जब छात्रों को Kaizen के बारे में समझा रहे थे तब छात्र एकदम अटेंशन की मुद्रा में आ गए थे। वे बड़े ही ध्यान से सुन रहे थे। नवीन गुप्ता ने छात्रों को मंजिल पाने की भूख पैदा करने सलाह तो दी, लेकिन बेवजह के कॉम्पटीशन से दूर करने को भी कहा। मौका था हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड कम्प्यूटर्स स्ट्डीज के एमबीए छात्रों की फेयरवेल और अचीवर्स अवॉर्ड्स का।
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कार्यक्रम की शुरुआत एमबीए जूनियर्स शिवानी, रूशिल तथा वैश्नवी ने सीनियर्स के स्वागत से की और तिलक करने के बाद फूल भेंट किए। इसके बाद वेलकम डांस हुआ, जिसे परफॉर्म किया अदिति अग्रवाल ने किया। अवार्ड फंक्शन में बेस्ट परफॉर्मर स्टूडेंट्स को सम्मानित भी किया गया।
बैच 2016 (एचआईएमसीएस) के सेकेंड ईयर में सबसे ज्यादा मार्क्स लाने वाली प्रगति ठाकुर को फर्स्ट और निष्ठा पुरी को सेकेंड प्राइज दिया गया। बैच 2017 में आकांक्षा प्रीति फर्स्ट और जतिन मलिक को सेकेंड प्राइज दिया गया। साथ ही बैच 2016 (एचसीएसटी) के सेकेंड ईयर में सबसे ज्यादा मार्क्स लाने वाली आकांक्षा गोयल को फर्स्ट प्राइज दिया गया। फर्स्ट प्राइज जीतने वाले स्टूडेंट्स को 7000 और सेकेंड प्राइज जीतने वाले स्टूडेंट्स को 5000 रुपये की पुरस्कार राशि दी गई है।
इसके अलावा अलग-अलग 10 कैटेगरीज में भी स्टूडेंट्स को प्राइज दिए गए। इन कैटेरीज में बैस्ट एकेडमिक परफॉर्मर, बैस्ट एक्स्ट्रा कैरिकुलर एक्टिविस्ट, सबसे अनुशासित छात्र, बैस्ट ऑन्टरप्रेन्योर और बैस्ट मेनैजमेंट स्किल शामिल हैं। कार्यक्रम में जूनियर्स और सीनियर्स ने मिलकर रंगारंग कार्यक्रम पेश किए। इनमें फन गेम्स, ग्रुप डांस, गायन और स्किट सबसे ज्यादा पसंद किए गए।
फाइनल ईयर के स्टूडेंट रतनजोत सिंह ने बैंड फरफॉर्मेंस दी और सबका मन मोह लिया। इस अवसर पर स्टूडेंट्स को सर्टिफिकेट भी दिए गए।
कार्यक्रम का संचालन सिद्धार्थ चौरसिया, दीपशिखा, अभिनव तिवारी, मोनिका वर्मा, आयुषी जैन और रिषभ चौधरी ने किया। इस दौरान शारदा ग्रुप के ईवीपी प्रदीप महाथा, टीएनपी और टीएनडी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर सुदिप्ता रॉय चौधरी समेत सभी फेकल्टी मेंबर्स मौजूद रहे। कार्यक्रम में डॉक्टर योगिता नारंग और तनु मारवाह की बेहद अहम भूमिका रही।