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शारदा ग्रुप के हिन्दुस्तान कॉलेज में कार्यशाला: DRDO डायरेक्टर ने समझाया वर्चुअल रियलिटी का सच

Mon, 11 Jun 2018 07:22 PM IST
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शारदा ग्रुप के प्रतिष्ठित संस्थान हिन्दुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में ‘डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग रिसर्च एवेन्यूज एंड ट्रेंड्स’6 दिवसीय टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। 4 जून को शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 9 जून तक चला। डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ (AKTU) की ओर से प्रायोजित इस कार्यशाला का आयोजन शारदा ग्रुप के प्रतिष्ठित संस्थान हिन्दुस्तान कॉलेज के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट द्वारा  किया गया। कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के 20 इंजीनियरिंग कॉलेजों के 30 से अधिक टीचर्स ने अपना पंजीकरण कराया। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि डीआरडीओ के निदेशक डॉक्टर सुशील चंद्रा रहे। कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य एवं विशिष्ट विभूतियों ने मां शारदा को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। 
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हिन्दुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित इस कार्यशाला में सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के अध्यक्ष और ‘डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग रिसर्च एवेन्यूज एंड ट्रेंड्स’के समन्वयक ए मुकुन्दलाल ने अपने विचार व्यक्त किए। इसके बाद निदेशक डॉक्टर राजीव कुमार उपाध्याय ने संस्थान के संक्षिप्त इतिहास पर प्रकाश डाला और कार्यशाला में आए सभी मुख्य अतिथि, विशिष्ट मेहमानों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। डॉक्टर राजीव कुमार उपाध्याय AKTU के कुलपति ने डॉक्टर विनय कुमार पाठक का धन्यवाद दिया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से यह उम्मीद जताई कि वह इस कार्यशाला के बाद इन क्षेत्रों में विशेज्ञता हासिल करने में सक्षम होंगे।

शारदा ग्रुप के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रदीप महथा ने कार्यशाला में आए टीचर्स को संबोधित करते हुए कहा कि समाज और उद्योग की जरूरतें उस थ्योरी से काफी अलग हैं, जो इन दिनों विभिन्न इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रमों में पढ़ाई जा रही है। ऐसे में इस प्रकार के फैकल्टी डिवेलपमेंट प्रोग्राम कराना बेहद जरूरी हो जाता है। इसमें कोई शक नहीं है कि हिन्दुस्तान कॉलेज में ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन AKTU का बेहद अच्छा कदम है। इस कार्यशाला में ट्रेनिंग लेने के बाद टीचर्स इंजीनियरिंग के छात्रों को इंडस्ट्री और समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से सक्षम बना सकेंगे।
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मुख्य अतिथि डीआरडीओ के निदेशक डॉक्टर सुशील चंद्रा ने कार्यशाला में बायोमेडिकल सिग्नल प्रोसेसिंग के बारे में सभी टीचर्स को अवगत कराते हुए ईसीजी और ईईजी के एनालिसिस के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मैडीटेशन करने वाले ईईजी सिग्नल में अन्य की तुलना में कम बदलाव आता है। उन्होंने यह भी बताया कि किसी बालक की असली वृद्धि 6 वर्ष के बाद शुरू होती है। उन्होंने डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग एप्रोच के तीन तरीके बताए- क्वांटीटेटिव, लोरेटा एवं ब्रेन नेटवर्क। उन्होंने वीडियो गेम्स के लाभ और हानि दोनों का मानव के मस्तिष्क पर असर भी बताया। साथ ही उन्होंने वर्चुअल रियलिटी के बारे में कार्यशाला में विस्तार से जिक्र किया। 

कार्यशाला का सफलतापूर्वक संचालन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर रोहिणी मित्तल और रूपाली महाजन ने किया। कार्यशला के अंत में धन्यवाद ज्ञापन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर ए. मुकुन्दलाल ने दिया। इस अवसर पर कॉलेज के डीन फेकल्टी डॉक्टर हरेन्द्र सिंह, इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट अध्यक्ष डॉक्टर संजय जैन, डॉक्टर आरके तिवारी, डॉक्टर वीके गुप्ता, डॉक्टर ऋचा कपूर, मुनीष खन्ना, शंकर ठाकर, प्रमोद कुमार, डॉक्टर निषांत सिंह, डॉक्टर पीके शर्मा, एएस कपूर मौजूद रहे।

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