कॉलेज प्रशासन पर क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
कर्मचारी संघ ने प्रशासनिक कामकाज, वित्तीय लेनदेन और कॉलेज के संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठाए हैं। संघ के प्रमुख आरोपों में शामिल हैं:
- दाखिले में विश्वविद्यालय के नियमों का पालन नहीं किया गया।
- शिक्षकों की छुट्टी और पदोन्नति से जुड़े काम में देरी हो रही है।
- कर्मचारियों की परिषद को नजरअंदाज किया जा रहा है।
- पैसों के लेनदेन और सामान खरीदने में गड़बड़ी हुई है।
- कॉलेज के संसाधनों का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने पर सवाल हैं।
- शासी निकाय की बैठकों का ब्योरा और जांचे गए खातों की जानकारी साझा नहीं की जा रही है।
- फीस और छात्रवृत्ति के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
- नियुक्तियों और शिक्षकों के कार्यकाल से जुड़े मामलों में गड़बड़ी का आरोप है।
- कॉलेज में बार-बार आग लगने की घटनाओं और इमारत की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है।
कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें क्या हैं?
एचसीएसए ने कॉलेज के प्रशासन और कामकाज में बदलाव के लिए कई मांगें रखी हैं। संघ चाहता है कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो और जवाबदेही तय की जाए। संघ की प्रमुख मांगें हैं:
- कॉलेज के प्राचार्य को पद से हटाया जाए।
- शासी निकाय के अध्यक्ष को भी हटाया जाए।
- दाखिले, पैसों के इस्तेमाल, खरीद, निर्माण और नियुक्तियों की जांच हो।
- संघ के अध्यक्ष, सचिव और एक वरिष्ठ शिक्षक को भेजे गए कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएं।
- दिल्ली विश्वविद्यालय कुछ समय के लिए कॉलेज का प्रबंधन अपने हाथ में ले।
- कॉलेज की देखरेख के लिए विस्तारित शासी निकाय बनाया जाए।
संघ का कहना है कि इन कदमों से कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने और निजीकरण की किसी भी संभावित कोशिश से संस्थान को बचाने में मदद मिलेगी।
शिक्षकों को मिले नोटिस पर क्या कहा गया?
कर्मचारी संघ का आरोप है कि प्राचार्य के कथित गलत कामों पर सवाल उठाने के कारण संघ के अध्यक्ष, सचिव और एक वरिष्ठ शिक्षक को कारण बताओ नोटिस भेजे गए। संघ ने इन नोटिसों को तुरंत और बिना किसी शर्त के वापस लेने की मांग की है। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ शिक्षकों को चुनकर निशाना बनाया गया। इनमें दलित और दूसरे कमजोर वर्गों के शिक्षक भी शामिल हैं। इन आरोपों पर कॉलेज प्रशासन का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
पैसों और कॉलेज के कामकाज का हिसाब क्यों मांग रहा है संघ?
कर्मचारी संघ ने कॉलेज में पैसों के इस्तेमाल और प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता की मांग की है। संघ चाहता है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की टिप्पणियों पर अमल किया जाए। इसके अलावा, कॉलेज को कुछ जरूरी दस्तावेज भी सार्वजनिक करने चाहिए।
इनमें शासी निकाय की बैठकों का ब्योरा, जांचे गए खाते, निविदाएं और ठेके से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। संघ ने कर्मचारियों की परिषद के अधिकार भी बहाल करने की मांग की है। उसका आरोप है कि परिषद को नजरअंदाज किया जा रहा है।
कंपनियों के नाम पर इमारतों के नाम रखने पर क्या विवाद है?
कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि कॉलेज की इमारतों के नाम कंपनियों से जुड़े दानदाताओं के नाम पर रखे जा रहे हैं या इमारतों पर उनका कब्जा हो रहा है। संघ ने इस मामले में चाइम्स ग्रुप, रिलैक्सो और अल्ट्रा इंटरनेशनल का नाम लिया है। उसका कहना है कि यह विश्वविद्यालय के नियमों के खिलाफ है। हालांकि, इस मामले में भी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली विश्वविद्यालय ने अब तक क्या जवाब दिया?
कर्मचारी संघ के मुताबिक, उसने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति और कॉलेज के शासी निकाय को ज्ञापन सौंपे हैं। लेकिन संघ का कहना है कि अब तक उसे कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। इसी वजह से संघ ने विश्वविद्यालय से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
विरोध प्रदर्शन में कौन-कौन से नेता पहुंचे?
कर्मचारी संघ के अनुसार, राज्यसभा सांसद मनोज झा और लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने भी प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित किया। संघ ने बताया कि दोनों नेताओं ने प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों और विद्यार्थियों का समर्थन किया।
फिलहाल, कॉलेज में कर्मचारियों का धरना जारी है। संघ प्राचार्य और शासी निकाय के अध्यक्ष को हटाने, आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने और दिल्ली विश्वविद्यालय से तुरंत कार्रवाई करने की मांग कर रहा है। इन आरोपों पर कॉलेज प्रशासन और दिल्ली विश्वविद्यालय का आधिकारिक जवाब आना बाकी है।