संवाद के दौरान मांडविया ने कहा कि केवल संवाद से ही हम एक ऐसे इको-सिस्टम का निर्माण कर सकते हैं, जहां सरकार और चिकित्सा शिक्षा के अन्य हितधारक सहमति तथा परामर्श के माहौल में आगे बढ़ते हैं। एक मजबूत चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र इसमें महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। बयान में कहा गया है कि प्रतिनिधियों ने नीट पीजी, नेक्स्ट, दाखिला, फैकल्टी की सेवानिवृत्ति की उम्र, जर्नल प्रकाश, ग्रामीण तैनाती के लिए बांड, जिला रेजिडेंसी कार्यक्रम, सुपर स्पेशिलिटी कोर्स, कम्युनिटी मेडिसिन में इंटर्नशिप, फोरेंसिक समेत अन्य स्ट्रीम में कम फैकल्टी जैसे मुद्दों को उठाया और अपने सुझाव दिए।
बातचीत के दौरान मंत्री ने उन मेडिकल कॉलेजों पर नाराजगी जताई, जो सेवा भाव के बजाय के लिए चिकित्सा शिक्षा को केवल व्यावसाय का मॉडन बना रहे हैं। मांडविया ने कहा कि देश में स्वास्थ्य को हमेशा एक सेवा के रूप में देखा जाता रहा है। उन्होंने निजी मेडिकल कॉलेजों से ऊर्जावान चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र बनाने में साझेदारी की भावना से आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने हील इन इंडिया और हील बाय इंडिया नई पहलों का जिक्र किया और कहा कि आइए हम चिकित्सा शिक्षा का भारत मॉडल बनाएं जो सुलभ, किफायती, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को परिभाषित करें।