फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और बढ़ते जीवन खर्च को लेकर कई हफ्तों से चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बाद सरकार ने विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया बदलने का फैसला किया है। सरकार ने घोषणा की है कि देश में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में आवेदन के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन मंच को 2028 में बदल दिया जाएगा। इससे पहले, 2027 में मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन कदमों के जरिए छात्रों की नाराजगी कम करने और दाखिले की प्रक्रिया में सुधार करने की कोशिश की जाएगी।
फ्रांस में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के दूसरे पाठ्यक्रमों में आवेदन के लिए पारकूरसुप नाम के ऑनलाइन मंच का इस्तेमाल किया जाता है। इसी व्यवस्था के जरिए छात्र अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन करते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दाखिले के लिए छात्रों का चयन किन नियमों के आधार पर किया जाता है, यह हमेशा साफ नहीं होता। इसके अलावा, छात्रों को अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों में दाखिला पाने के समान अवसर नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यही व्यवस्था आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा बनी।
आंदोलन के बाद सरकार पर क्यों बढ़ा दबाव?
फ्रांस में 17 अक्टूबर को शिक्षा के लिए सरकारी धन और बढ़ते जीवन खर्च के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। देश के कई हिस्सों में आगजनी, लूटपाट और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं हुईं। प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया, जिनमें मार्सेई का नगर भवन भी शामिल था। दुकानों में लूटपाट और आग लगाने की घटनाएं भी सामने आईं। इसके बाद शनिवार को देशभर में एक और प्रदर्शन हुआ, जिसमें हिंसा अपेक्षाकृत कम रही। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या चार लाख से अधिक बताई, जबकि आयोजकों का दावा था कि इसमें करीब आठ लाख लोग शामिल हुए।
छात्रों की मांगों पर सरकार ने क्या कहा?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को दक्षिणी बंदरगाह शहर मार्सेई के दौरे के दौरान छात्रों की मांगों पर ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार से आंदोलन के पीछे मौजूद जायज मांगों पर काम करने को कहा गया है। उच्च शिक्षा मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट ने भी दाखिला प्रणाली में 2027 में बड़े बदलाव करने की घोषणा की। इसके बाद 2028 में मौजूदा मंच की जगह नई व्यवस्था लाई जाएगी। प्रधानमंत्री सेबास्तियां लेकोर्नू ने भी घोषणा से पहले स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
दाखिले के अलावा छात्रों की और क्या मांगें हैं?
छात्र केवल विश्वविद्यालयों में दाखिले की व्यवस्था बदलने की मांग नहीं कर रहे हैं। वे स्कूलों में पढ़ाई की बेहतर सुविधाएं, शिक्षकों की कमी दूर करने, पुरानी इमारतों की मरम्मत और कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या कम करने जैसे मुद्दे भी उठा रहे हैं। छात्रों की मांग है कि शिक्षकों की अनुपस्थिति होने पर पढ़ाई प्रभावित न हो और उनकी जगह दूसरे शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं। सरकार ने 8 अक्टूबर को मुश्किलों का सामना कर रहे माध्यमिक स्कूलों में तीन हजार अतिरिक्त अस्थायी शिक्षक तैनात करने की घोषणा की थी। यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है, जब फ्रांस में गरीबी और सरकारी कर्ज दोनों रिकॉर्ड स्तर पर बताए जा रहे हैं।