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यूरोप, एशिया की ज्यादातर यूनिवर्सिटी ले रही हैं अंतिम वर्ष की परीक्षा,भारतीय छात्रों के लिए लिया फैसला

Thu, 09 Jul 2020 06:35 AM IST
संदीप भट्ट सीमा शर्मा, अमर उजाला, दिल्ली
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भारतीय छात्रों के भविष्य, व्यापक हित, नौकरी और उच्च शिक्षा के चलते कॉलेजों में फाइनल ईयर की परीक्षा लेने का फैसला लिया है। दरअसल कोविड-19 महामारी के बीच यूरोप और एशिया की अधिकतर यूनिवर्सिटी फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षा आयोजित कर रही है। ऐसे में यदि भारतीय विश्वविद्यालय परीक्षा नहीं लेते तो इससे छात्रों को ही भविष्य में परेशानी होती। 

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यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन के मुताबिक, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में फाइनल ईयर की परीक्षा करवायी जाए या नहीं, इस पर विस्तार से चर्चा के बाद फैसला लिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल थे। कोविड-19 पर भारत समेत दुनियाभर के देशों की शिक्षा के फैसले को भी परखा गया। 

सीटिंग प्लान भी तैयार

बेशक अभी छात्र, शिक्षक और अभिभावक इसे गलत फैसला मान रहे हैं। हालांकि यह छात्रों की बेहतरी और हित में है। विदेशी यूनिवर्सिटी और देशों ने भी इन्हीं हितों को ध्यान में रखकर फैसला लिया है। क्योंकि फाइनल ईयर की डिग्री के आधर पर नौकरी, उच्च शिक्षा, स्कॉलरशिप, अवार्ड की दावेदारी होती है। परीक्षा के आधार पर प्राप्त डिग्री पर कभी कोई सवाल नहीं उठते है। परीक्षा के फैसले के साथ-साथ सीटिंग  प्लान भी तैयार किया गया है। इसमें मॉस्क, सेनेटाइज करना, एक सीट छोड़कर छात्र को बिठाना, उसके स्वास्थ्य की जांच के आधार पर उसे परीक्षा में बैठने की इजाजत होगी। 

ऑक्सफोर्ड,एमआईटी,कैंब्रिज भी ले रही परीक्षा

एमआईटी(यूएसए), यूनिवर्सिटी ऑफ कैब्रिज,इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन (यूके),यूनिवर्सिटी ऑफ टोरेंटो और एसीमॉस्टर(कनाडा),यूनिवर्सिटी ऑफ  (जर्मनी),यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर समेत कई अन्य बड़ी यूनिवर्सिटी फाइनल ईयर की परीक्षा ले रही है। इसमें ऑफलाइन, ऑनलाइन और ब्लेंडेड (मिश्रित विधि) का प्रयोग किया गया है। 

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