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देेश के पहले केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को मिली मंजूरी

Mon, 26 Aug 2019 08:49 AM IST
Garima Garg सीमा शर्मा, अमर उजाला
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mhrd - फोटो : amar ujala
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देेश की पहली संस्कृत सेंट्रल यूनिवर्सिटी को वित्त मंत्रालय और नीति आयोग की मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार को अब कानून मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है। यहां मंजूरी मिलने के साथ ही राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृति विद्यापीठ दिल्ली और राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम तिरुपति को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी से सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने का रास्ता खुल जाएगा। उम्मीद है कि कैबिनेट में मसौदा पास होते ही शीतकालीन सत्र में पहली संस्कृत सेंट्रल यूनिवर्सिटी का बिल पास हो जाएगा।

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, संस्कृत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पहली संस्कृत सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने की योजना तैयार की गई है। संस्कृत प्राचीन भारत की पहचान रही है। योग की तर्ज पर दुनियाभर में संस्कृत को पहचान दिलाने के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाई जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृति विद्यापीठ दिल्ली और राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम तिरुपति को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है। तीनों राष्ट्रीय संस्थान संस्कृत में ही पढ़ाई कराते हैं। इसलिए तीनों संस्थानों को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा बनाने के लिए चुना गया है।

राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली की स्थापना 1970 में हुई थी। लाल बहादुर राष्ट्रीय संस्कृति विद्यापीठ को 1962 में खोला गया था। तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ की स्थापना 1961 में की गई थी। तीनों डीम्ड संस्थान केंद्र सरकार के अधीनस्थ हैं। इससे पहले भारत में भाषा पर आधारित दो सेंट्रल यूनिवर्सिटी हैं, जिसमें इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी (ईएफएलयू) और मौलाना आजाद उर्दू यूनिवर्सिटी हैं। ये दोनों ही विश्वविद्यालय हैदराबाद में हैं। हालांकि, संस्कृत के लिए ऐसी कोई यूनिवर्सिटी नहीं है।
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