आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटी ने कहा, "जेईई-आधारित एडमिशन में, आवेदन चरण से ही शुल्क छूट और शुल्क माफी प्रदान की जाती है। आवेदन चरण में, एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी (विकलांग व्यक्ति) से संबंधित छात्रों को केवल आधी परीक्षा शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी और ओबीसी श्रेणियों में प्रवेश बढ़ाने के लिए कट-ऑफ में छूट दी गई है।"
उन्होंने कहा, "वर्तमान में 23 आईआईटी हैं और शिक्षा मंत्रालय के समाज के वंचित वर्गों के छात्रों को सहायता प्रदान करने पर फोकस के अनुसार, कई पहल की गई हैं। इनके अलावा, कुछ आईआईटी व्यक्तिगत रूप से भी अतिरिक्त उपाय करते हैं।"
उन्होंने कहा कि आईआईटी द्वारा प्रदान की जाने वाली उच्च गुणवत्ता की शिक्षा से अधिक संख्या में छात्रों को लाभान्वित करने के लिए, एससी, एसटी छात्रों को जो चयन कट-ऑफ में छूट से कम अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें प्रारंभिक कोर्स के माध्यम से विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, जो उन्हें प्रारंभिक कोर्स को पूरा करने के बाद सीधे आईआईटी में शामिल होने में सक्षम बनाता है।
उम्मीदवारों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए एक बहुभाषी कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया था। अंतिम समय में तकनीकी खामियों वाले मामलों (जिन्होंने कम से कम एक भुगतान का प्रयास किया) को संभालने के लिए इस साल यह शुरू किया गया था।
एडमिशन प्रक्रिया के दौरान, सभी एलिजिबल उम्मीदवारों को सीट हासिल करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने के लिए सीट स्वीकार करने के लिए फीस जमा करनी होती है। एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी छात्रों को नियमित उम्मीदवारों की तुलना में केवल 50% फीस देनी होती है। कामकोटि ने बताया किया कि पहले, इस फीस के बिना, कई छात्रों ने सीटों को ब्लॉक कर दिया था, लेकिन कक्षाओं में नहीं जा पाए, जिससे कई सीटें खाली हो गईं।
उन्होंने कहा, "चूंकि सीट आवंटन प्रक्रिया में, एससी और एसटी के लिए आरक्षित सीटें केवल उन्हें ही आवंटित की जा सकती हैं, इसलिए एससी या एसटी सीट खाली रहने के परिणामस्वरूप किसी अन्य योग्य आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को एक कीमती आईआईटी सीट से वंचित किया जाता है।"
उन्होंने कहा, "यदि किसी छात्र के माता-पिता की आय 1 लाख रुपये से कम है, चाहे वह किसी भी श्रेणी का हो, तो सभी 23 आईआईटी द्वारा पूरी ट्यूशन फीस माफ कर दी जाती है। इसके अलावा, एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी पूरी ट्यूशन छूट प्रदान की जाती है।" उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के छात्रों, जिनके माता-पिता की आय 1 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के बीच है, उनकी ट्यूशन फीस का दो-तिहाई हिस्सा माफ कर दिया जाता है।