Feedback Review: चाहे आप पेशेवर हों या कोई छात्र, समय-समय पर आपको फीडबैक मिलते रहते होंगे। यह बताता है कि दूसरे आपके व्यवहार, कौशल और काम को किस नजरिये से देखते हैं। इसे व्यक्तिगत आलोचना के बजाय व्यक्तिगत विकास और कॅरिअर के बढ़ते अवसर के रूप में देखना चाहिए। हर एक फीडबैक कुछ न कुछ सीखाते ही हैं, चाहे वह अच्छे हों या बुरे। जहां सकारात्मक फीडबैक से लक्ष्य तक पहुंचने में सहूलियत होती है, वहीं नकारात्मक फीडबैक का मतलब आपके आत्मविश्वास को कम करना कतई नहीं होता है। यह दर्शाता है कि आप कुछ पक्षों को मजबूत करके सफल हो सकते हैं। ध्यान रखें, आपको जो भी फीडबैक मिले उसका निष्पक्ष रूप से आकलन करना बेहद जरूरी है।
संयम दिखाएं
फीडबैक मिलते ही उससे सहमत या असहमत न हों। तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देने के बजाय, उस पर गंभीरता से विचार करें। ऐसा करने से आपकी भावनाएं आपकी प्रतिक्रिया पर हावी नहीं हो पाएंगी। साथ ही, फीडबैक को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद मिलेगी।
खुद को दें समय
किसी भी फीडबैक से जुड़ी भावनात्मक प्रतिक्रिया को सोचने और समझने के लिए आपको समय निकालना चाहिए। भावनात्मक प्रतिक्रिया से तात्पर्य आपकी खुशी या हताशा से है। सकारात्मक फीडबैक से आपको खुशी मिलती है, जबकि विपक्ष में दिए गए किसी भी फीडबैक से आप निराश हो जाते हैं। इनके कारणों की पहचान करके, आप फीडबैक को बेहतर ढंग से तो समड़ा ही पाएंगे, साथ ही यह भी जान पाएंगे कि यह आपके व्यक्तिगत विकास से कैसे संबंधित है। संभावित बदलावों के बारे में सोचने के लिए खुद को समय दें।
स्रोत पर विचार करें
फीडबैक देने वाला स्रोत क्या है, यह पहचानना बेहद जरूरी है। अगर कोई आपकी आलोचना कर रहा है, तो इसे दिल पर न लें। इससे डरने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि आपकी आलोचनाएं भी आपके लिए लाभकारी हो सकती हैं। ऐसे में, खुद से कुछ सवाल पूछे जैसे कि क्या वह व्यक्ति वास्तव में आपकी तरक्की चाहता है? या क्या उसके पास संबंधित क्षेत्र में ज्ञान या अनुभव है? अगर आपका जवाब 'ना' है, तो फीडबैक चुनने में चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।
धीरे-धीरे अमल में लाएं
जब आप फीडबैक पर कार्रवाई करने के लिए तैयार हो जाएं, तो इससे जुड़े बदलावों को धीरे-धीरे लागू करें। एक वार में सब कुछ बदलने की कोशिश न करें। बजाय इसके ऐसा दृष्टिकोण अपनाएं, जिससे यह बदलाव आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाए।