अधिवक्ता कुश कालरा द्वारा दायर जनहित याचिका में सरकार पर संस्थागत भेदभाव का आरोप लगाया गया था और नौसेना विश्वविद्यालय में भी पुरुष उम्मीदवारों के बराबर महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के निर्देश देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान, केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने तर्क दिया कि सेवा मामले के विषय पर दायर जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। हालांकि, उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना विश्वविद्यालय प्रवेश योजना, कार्यकारी शाखा सामान्य सेवा (x) कैडर, आईटी, और तकनीकी शाखा इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल शाखा में महिला उम्मीदवारों को दाखिलों की अनुमति पहले से ही दी गई है।
धारा 9(2) की संवैधानिक वैधता को चुनौती नहीं दी गई
एएसजी ने कहा कि याचिकाकर्ता ने भारतीय नौसेना अधिनियम की धारा 9(2) की संवैधानिक वैधता को चुनौती नहीं दी है। धारा 9(2) के अनुसार, कोई भी महिला भारतीय नौसेना या भारतीय नौसेना रिजर्व बलों में नामांकन के लिए तब तक पात्र नहीं होगी, जब तक कि ऐसे विभाग, शाखा या अन्य निकाय जो कि उनसे जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सरकार मनमाने ढंग से महिलाओं को सभी शाखाओं में सेवा करने के अधिकार से वंचित करके संस्थागत भेदभाव कर रही है।