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Engineer's Day 2025: विश्वेश्वरैया से शुभांशु शुक्ला तक, भारत के 10 इंजीनियर जिन्होंने दुनिया को नई दिशा दी

Mon, 15 Sep 2025 02:44 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Engineer's Day 2025: भारत और भारतीय उपमहाद्वीप के इंजीनियरों ने विज्ञान, तकनीक और समाज की दिशा बदली है। विश्वेश्वरैया, कल्पना चावला, अब्दुल कलाम, सुंदर पिचाई और ई. श्रीधरन जैसे महान इंजीनियरों का योगदान भारत को विश्व पटल पर अलग पहचान दिलाता है।
 
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Engineer's Day 2025 - फोटो : Freepik
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विस्तार
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Engineer's Day 2025: भारत ने विज्ञान और तकनीक की दुनिया को कई महान इंजीनियर दिए हैं। इनकी खोजों, आविष्कारों और योगदानों ने न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया की दिशा बदली है। इंजीनियर्स डे (15 सितंबर) के अवसर पर हम आपको ऐसे 10 भारतीय इंजीनियरों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से इंजीनियरिंग और समाज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

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1. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (1861-1962)

भारत रत्न से सम्मानित सर एम. विश्वेश्वरैया को आधुनिक भारत का सबसे बड़ा इंजीनियर माना जाता है। उन्होंने बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को वैज्ञानिक रूप दिया। उन्होंने ओडिशा, हैदराबाद और महाराष्ट्र में कई परियोजनाओं से अपनी इंजीनियरिंग प्रतिभा का लोहा मनवाया। जल संसाधन प्रबंधन में उनके योगदान ने भारत की कृषि और औद्योगिक प्रगति को नई दिशा दी। उनके नाम पर ही हर साल 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है।

2. सत्येन्द्रनाथ बोस (1894-1974)

एक महान भौतिकविद और इंजीनियरिंग विचारक, सत्येन्द्रनाथ बोस ने अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ क्वांटम मैकेनिक्स पर शोध किया। उनका योगदान बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी और बोसॉन सिद्धांत में रहा, जिसने आधुनिक भौतिकी को नया आयाम दिया। इंजीनियरिंग और गणितीय मॉडलिंग में उनकी गहरी समझ ने भारत को वैश्विक वैज्ञानिक मानचित्र पर स्थापित किया। बोस का काम आज भी पार्टिकल फिजिक्स और नैनोटेक्नोलॉजी में महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

3. ई. श्रीधरन (1932- )

भारत के "मेट्रो मैन" के नाम से प्रसिद्ध ई. श्रीधरन ने भारतीय रेलवे और मेट्रो सिस्टम को आधुनिक रूप दिया। कोलकाता और दिल्ली मेट्रो के निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने कोकण रेलवे जैसी चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को सफलता से पूरा किया। उनकी इंजीनियरिंग प्रबंधन शैली और कार्य नैतिकता के कारण भारत में शहरी परिवहन प्रणाली की दिशा बदली। उन्हें 2001 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

4. वेंकटरामन रामकृष्णन (1952- )

नोबेल पुरस्कार विजेता वेंकटरामन रामकृष्णन बायोस्ट्रक्चरल रिसर्च और आणविक जीवविज्ञान में अग्रणी हैं। उन्होंने राइबोसोम की संरचना पर शोध कर जीवन विज्ञान और मेडिकल इंजीनियरिंग की दुनिया में क्रांति ला दी। उनका शोध कैंसर और संक्रमण रोगों के इलाज में दवाओं की डिज़ाइनिंग के लिए आधार बना। इंजीनियरिंग दृष्टिकोण से उनकी रिसर्च ने बायोटेक्नोलॉजी उद्योग को नई दिशा दी। वे रॉयल सोसाइटी, लंदन के अध्यक्ष भी रहे हैं।

5. सत्य नडेला (1967- )

हैदराबाद से पढ़ाई करने वाले सत्य नडेला आज माइक्रोसॉफ्ट के CEO हैं। उनका करियर इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस की उपलब्धियों से भरा है। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट को क्लाउड टेक्नोलॉजी और AI-आधारित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाया। नडेला के नेतृत्व में माइक्रोसॉफ्ट ने डिजिटल क्रांति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी सफलता लाखों भारतीय इंजीनियरों के लिए प्रेरणा है।

6. सुंदर पिचाई (1972- )

गूगल और अल्फाबेट के CEO सुंदर पिचाई ने IIT खड़गपुर से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उनकी तकनीकी दृष्टि और प्रबंधन कौशल ने गूगल क्रोम, एंड्रॉयड और AI प्रोजेक्ट्स को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। पिचाई का योगदान वैश्विक इंटरनेट क्रांति में रहा, जिससे करोड़ों लोगों तक डिजिटल टेक्नोलॉजी सुलभ हुई। वे भारतीय इंजीनियरों के विश्व स्तर पर योगदान का प्रतीक हैं।

7. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (1931-2015)

भारत के "मिसाइल मैन" और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम महान वैज्ञानिक और एयरोस्पेस इंजीनियर थे। उन्होंने ISRO और DRDO के माध्यम से भारत की स्पेस और डिफेंस टेक्नोलॉजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। SLV-III, अग्नि और पृथ्वी मिसाइल परियोजनाओं में उनकी प्रमुख भूमिका रही। कलाम का योगदान न सिर्फ विज्ञान बल्कि शिक्षा और युवा प्रेरणा में भी अतुलनीय है।

8. कल्पना चावला (1962-2003)

भारत में जन्मी और नासा की अंतरिक्ष यात्री बनीं कल्पना चावला एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की मिसाल हैं। उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया। चावला ने नासा में एयरोनॉटिकल इंजीनियर के रूप में काम किया और 1997 व 2003 में स्पेस मिशन का हिस्सा बनीं। दुर्भाग्य से कोलंबिया शटल हादसे में उनका जीवन समाप्त हुआ, लेकिन उनकी प्रेरणादायक यात्रा आज भी इंजीनियरिंग और विज्ञान के छात्रों को नए सपने देखने की हिम्मत देती है।

9. सुभांशु शुक्ला (1980- )

उत्तर प्रदेश के इंजीनियर सुभांशु शुक्ला ने आरटी-आधारित आर्टिफिशियल हार्ट वाल्व विकसित कर भारत को मेडिकल इंजीनियरिंग में आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग दिखाया। IIT कानपुर और SGPGI के सहयोग से बने उनके शोध ने भारत को हाई-कॉस्ट इंपोर्टेड हार्ट वाल्व से मुक्ति दिलाई। उनके योगदान से न केवल मेडिकल टेक्नोलॉजी सस्ती हुई बल्कि लाखों मरीजों को नया जीवन मिला। वे आज भारतीय बायोमेडिकल इंजीनियरिंग का प्रेरणास्रोत हैं।
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10. फाज़लुर रहमान खान (1929-1982)

बांग्लादेश में जन्मे लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़े फाज़लुर रहमान खान को "Father of Tubular Designs" कहा जाता है। उन्होंने आधुनिक गगनचुंबी इमारतों के डिजाइन की नई तकनीक विकसित की। शिकागो का विलिस टॉवर (पहले सीअर्स टॉवर) उनकी इंजीनियरिंग प्रतिभा का प्रमाण है। उनका काम आज भी सिविल इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर के क्षेत्र में आधार माना जाता है।

हालांकि, ऐसे कई अन्य प्रतिभाशाली इंजीनियर रहे हैं और वर्तमान में भी हैं, जिनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन 10 महान भारतीय इंजीनियरों सहित उन सभी का योगदान समाज और तकनीक की दिशा बदलने में उल्लेखनीय है।
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