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Report: क्या बढ़ने वाली है स्कूल-कॉलेजों की कमाई? जानें ताजा रिपोर्ट में हुआ क्या खुलासा

Mon, 12 Jan 2026 05:58 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Report: स्कूल और कॉलेजों की आय में 11-13% बढ़ोतरी का अनुमान है, जो फीस बढ़ोतरी और नामांकन बढ़ने से आएगी। हालांकि, सैलरी और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ने के कारण मुनाफा नहीं बढ़ेगा। यह खुलासा एक ताजा रिपोर्ट में हुआ है। आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में और क्या-क्या बातें सामने आईं...
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Crisil Ratings Report: क्रिसिल रेटिंग्स (Crisil Ratings) की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के शैक्षणिक संस्थानों की कुल आय में मौजूदा वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में 11 से 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से छात्रों के बढ़ते नामांकन और विभिन्न स्तरों पर फीस में बढ़ोतरी के कारण होगी।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूल और कॉलेज स्थिर मांग का फायदा उठा रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। हालांकि, शैक्षणिक संस्थानों को स्टाफ की सैलरी, प्रशासनिक खर्च और अन्य संबंधित लागतों पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। इसी वजह से इनके ऑपरेटिंग मार्जिन 27 से 28 प्रतिशत के आसपास स्थिर बने रहने की उम्मीद है।

कॉलेजों को इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना होगा

छात्रों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ संस्थानों को नई कक्षाएं, अतिरिक्त सुविधाएं और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) भी करना होगा। इसके बावजूद, रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत कैश फ्लो के कारण संस्थानों को ज्यादा बाहरी कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनकी क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर बनी रहेगी।

क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर हिमांक शर्मा ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में शैक्षणिक संस्थानों की कुल आय में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिलेगी। फीस में बढ़ोतरी और नामांकन में सुधार इसकी मुख्य वजह होंगे, हालांकि नामांकन की रफ्तार सीमित रह सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि खासकर शहरी इलाकों में महंगाई बढ़ने के कारण फीस में इजाफा किया जा रहा है, लेकिन सैलरी और सुविधाओं पर बढ़ता खर्च मार्जिन को बेहतर नहीं होने देगा।

K-12 सेगमेंट की आय में वृद्धि की संभावना

रिपोर्ट के अनुसार, K-12 सेगमेंट, जो इस सेक्टर की कुल आय का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, उसमें 9 से 10 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि की संभावना है। यह वृद्धि शहरीकरण, लोगों की बढ़ती भुगतान क्षमता और निजी स्कूलों में सालाना फीस बढ़ोतरी के चलते होगी।

इसके अलावा, रिपोर्ट में बताया गया है कि इंजीनियरिंग कोर्सेज की मांग अब भी मजबूत बनी हुई है, भले ही वैश्विक मंदी, जॉब मार्केट में उतार-चढ़ाव और अमेरिका में वीज़ा व इमिग्रेशन से जुड़ी दिक्कतें बनी हुई हों।

मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति मजबूत बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, एमबीबीएस जैसे अंडरग्रेजुएट कोर्सेज की मांग लगातार सप्लाई से ज्यादा बनी हुई है। वहीं, नर्सिंग, फार्मेसी, फिजियोथेरेपी जैसे अन्य कोर्सेज में मांग मध्यम स्तर की रही है।
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मेडिकल कोर्सेज में नामांकन बढ़ने की संभावना

क्रिसिल रेटिंग्स ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने और शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर दिया जा रहा जोर, आने वाले समय में मेडिकल कोर्सेज में नामांकन को और बढ़ावा देगा।

रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों की मजबूत फीस वसूली से होने वाला कैश फ्लो इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में इस्तेमाल किया जाएगा। इस वजह से उनका डेट लेवल और ब्याज भुगतान क्षमता स्वस्थ बनी रहेगी। मौजूदा वित्त वर्ष में गियरिंग रेशियो 0.37 गुना और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 7.6 गुना रहने की उम्मीद है, जो पिछले वित्त वर्ष के समान है।
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