इंजीनियरिंग और मेडिकल में दाखिले के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण हो रही छात्रों की आत्महत्याओं की घटनाओं को रोकने के लिए गाइडलाइन 'उम्मीद' राज्यों को भेजी है। इसके तहत स्कूलों को वेलनेस टीमें गठित करनी होगी। इसमें वाइस प्रिंसिपल, हैडमास्टर्स, शिक्षक, छात्र, वार्डन, अभिभावक और काउंसलर शामिल होंगे। उन्हें बच्चों के बातचीत के लहजे व व्यवहार का आकलन करने होगा। इसके अलावा बच्चों में आने वाले किसी भी तरह के असमान्य बदलाव नोटिस किए जाने पर एहतियाती कदम उठाने होंगे।
शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इंजीनियरिंग और मेडिकल दाखिले की नाकामयाबी से निराश छात्रों में उम्मीद की रोशनी भरने की तैयारी की गई है। अगर छात्र से समय रहते बातचीत की जाए और उसके व्यवहार का आकलन किया जाए तो उसके अनमोल जीवन को बचाया जा सकता है। इसकी जिम्मेदारी शिक्षकों और परिवार पर भी है। सभी को मिलकर छात्रों को तनाव से बाहर निकालना होगा।
छात्रों की चेतावनी को समझना
स्कूलों के लिए तैयार गाइडलाइन को कई भागों में बांटा गया है। इसमें आत्महत्या के कारण, भ्रांतियां और सच्चाई, आत्महत्या को प्रभावित करने वाले कारक, छात्रों के चेतावनी संकेत को शामिल किया गया है। चेतावनी संकेत मिलने के बाद अब स्कूलों को बच्चे को बचाने की जिम्मेदारी शुरू होगी। इसमें स्कूल को वातावरण में सकारात्मकता लानी होगी। आत्महत्या की रोकथाम के लिए क्षमता निर्माण करनी होगी।
बातचीत और व्यवहार से परखें मनोदश
गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर को पीड़ित छात्र अपने दोस्तों, परिवार में यह कहता है कि मेरी इस दिक्कत का कोई समाधान नहीं कर सकता, मैं बिल्कुल बेकार हूं, मैं मानसिक और शारीरिक रूप से थक गया हूं, मैं हर समय उदास महसूस करता हूं, अब कुछ भी ठीक नहीं होगा जैसे वाक्य बोलता है। अचानक से दोस्तों, सोशल मीडिया, क्लासरूम से गायब रहने लगे, हर समय ध्यान कहीं और रहे, सोने के समय में अचानक बदलाव, कपड़े, बाल और अपना सामान का ध्यान नहीं रखने के लक्षण दिखते हैं। तो इसे खतरे की घंटी समझा जाए।
तनावग्रस्त छात्रों को अकेले नहीं छोड़ें
गाइडलाइन के अनुसार, शिक्षक यदि बच्चे के व्यवहार में बदलाव देखता है तो उसे बच्चे से बातचीत करते समस्याओं की जानकारी लेकर उसका समाधान करना चाहिए। तनावग्रस्त छात्रों को अकेले बिल्कुल नहीं छोड़ें। दोस्ताना व्यवहार के साथ परिवार, अन्य शिक्षकों और काउंसिलिंग टीमों की मदद लें। इसके अलावा स्कूलों को अपने कैंपस और क्लासरूम में सकारात्मक व्यवहार का निर्माण करना होगा, ताकि कोई भी छात्र बिना किसी डर के आसानी से अपनी बात रख सके।
तनाव के मुख्य कारण
गाइडलाइन में पढ़ाई, परिवार या किसी दोस्त से लड़ाई, परीक्षा में कम अंक आना, परिवार का दूसरे बच्चों से तुलना, स्कूल में शिक्षक से प्रताड़ित किया जाना, आदि को बच्चे के तनाव का प्रमुख कारण माना गया है।