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Edu Ministry: NCERT ने क्यों ब्लैकलिस्ट की पेपर सप्लाई करने वाली कंपनी? शिक्षा मंत्रालय ने दिए जांच के आदेश

Fri, 10 Jul 2026 03:16 PM IST
Akash Kumar पीटीआई, नई दिल्ली

सार

Education Ministry: एनसीईआरटी की किताबों के लिए कागज सप्लाई करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के फैसले पर अब जांच होगी। सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मामले में चूक करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
 
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NCERT Paper Supplier Blacklist Case - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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Education Ministry: एनसीईआरटी द्वारा पाठ्यपुस्तकों के लिए कागज उपलब्ध कराने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का मामला अब शिक्षा मंत्रालय तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा है, जिन्होंने अदालत में एनसीईआरटी का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा।

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क्या है पूरा मामला?

मामला बाफना ग्लोबल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से जुड़ा है, जिसे एनसीईआरटी की किताबों के लिए कागज की आपूर्ति करनी थी। आरोप है कि कंपनी तय समयसीमा के भीतर आपूर्ति नहीं कर सकी थी।

इसके बाद एनसीईआरटी ने 22 जून को कंपनी को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था और उसे भविष्य की खरीद प्रक्रियाओं में हिस्सा लेने से रोक दिया था।
  • बाफना ग्लोबल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड एनसीईआरटी के लिए कागज सप्लाई कर रही थी।
  • कंपनी पर तय समयसीमा के भीतर आपूर्ति नहीं करने का आरोप है।
  • एनसीईआरटी ने 22 जून को कंपनी को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया।
  • ब्लैकलिस्ट होने के बाद कंपनी को एनसीईआरटी की खरीद प्रक्रियाओं में हिस्सा लेने से रोक दिया गया।

मामला हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा?

कंपनी ने 24 जून को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और एनसीईआरटी के फैसले को चुनौती दी। सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी की ओर से कोई भी प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई तक कंपनी के खिलाफ किसी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी।
  • कंपनी ने 24 जून को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
  • सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी की ओर से कोई पेश नहीं हुआ।
  • अदालत ने फिलहाल कंपनी को राहत दी है।
  • हाईकोर्ट ने एनसीईआरटी को 6 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक गारंटी भुनाने से भी रोक दिया है।

शिक्षा मंत्रालय ने जांच के आदेश क्यों दिए?

सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा मंत्रालय ने इस बात को गंभीरता से लिया है कि एनसीईआरटी अदालत में अपने फैसले का प्रभावी बचाव नहीं कर सका। इसी वजह से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मामले में जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
  • शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
  • अदालत में जरूरी कानूनी कदम नहीं उठाने को गंभीर चूक माना गया है।
  • मंत्रालय ने प्रशासनिक और कानूनी लापरवाही पर सख्त रुख अपनाने की बात कही है।
  • पाठ्यपुस्तकों के उत्पादन और खरीद प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
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कंपनी ने देरी की क्या वजह बताई?

कंपनी ने अदालत में दावा किया कि किताबों की छपाई में देरी उसकी गलती नहीं थी। फर्म के मुताबिक, ईरान में युद्ध के कारण हाइड्रोजन पेरॉक्साइड की उपलब्धता प्रभावित हुई थी। यही रसायन कागज निर्माण के दौरान ब्लीचिंग एजेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
  • कंपनी ने देरी के लिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया।
  • फर्म के अनुसार, ईरान युद्ध के कारण हाइड्रोजन पेरॉक्साइड की कमी हुई थी।
  • हाइड्रोजन पेरॉक्साइड कागज निर्माण में इस्तेमाल होने वाला अहम रसायन है।
  • इसी वजह से समय पर कागज की आपूर्ति प्रभावित हुई।

मामले की अगली सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में 20 जुलाई को होगी। वहीं, शिक्षा मंत्रालय की जांच के बाद इस पूरे विवाद में आगे की कार्रवाई तय होगी।
 
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