अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत-2025 कॉन्क्लेव में एमिटी यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. (डॉ.) बलविंदर शुक्ला ने कहा कि एआई (AI) के आने से शिक्षा के तौर-तरीके जरूर बदले हैं, लेकिन शिक्षकों की भूमिका अब भी सबसे महत्वपूर्ण है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत-2025 कॉन्क्लेव के समापन सत्र को संबोधित करते हुए एमिटी यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. (डॉ.) बलविंदर शुक्ला ने बदलते दौर में शिक्षकों की भूमिका और एआई के प्रभाव पर अपने विचार रखे। इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक चाहे कितनी भी आगे बढ़ जाए, छात्रों को सही दिशा दिखाने और उनमें मानवीय मूल्यों का संचार करने में शिक्षक का स्थान कोई मशीन नहीं ले सकती।
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प्रो. शुक्ला ने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा जगत में आए भारी बदलावों का जिक्र करते हुए कहा, "टीचर का बहुत बड़ा रोल है कि कैसे वे बच्चों को मेंटर करें और कैसे वो मानवता को आगे बढ़ाएं। मैंने देखा है कि पिछले चार वर्षों में परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। एआई के दौर में पढ़ने और पढ़ाने के तौर-तरीके पूरी तरह से बदल गए हैं।" उन्होंने एआई को चुनौती के बजाय एक अवसर के रूप में देखने की सलाह दी। उन्होंने आगे कहा, "हमें नई तकनीक से डरने के बजाय उससे सीखते हुए और उसका सही इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है।"
प्रो. शुक्ला ने जोर दिया कि तकनीक एक साधन है, साध्य नहीं। इसका उपयोग मानवता की भलाई और छात्रों के कौशल विकास के लिए होना चाहिए। उनके संबोधन ने इस बात पर मुहर लगाई कि भविष्य की शिक्षा में तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन ही सफलता की कुंजी होगा।