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DUSU: डूसू अध्यक्ष को नहीं मिलती सैलरी, 20 लाख का मिलता है बजट; छात्रों के कार्यक्रम और रिसर्च पर होता है खर्च

Sun, 21 Sep 2025 08:13 AM IST
शाहीन परवीन अमर उजाला ब्यूरो

सार

DUSU: डूसू अध्यक्ष को कोई सैलरी नहीं मिलती। हालांकि, छात्रसंघ के पास 20 लाख रुपये का बजट है, जो छात्रों की सांस्कृतिक गतिविधियों, इवेंट्स और रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर खर्च होता है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP प्रत्याशियों की जीत से भाजपा उत्साहित - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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DUSU President: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) अध्यक्ष को सैलरी नहीं मिलती है। यानि इसी के अध्यक्ष बने आर्यन मान को सीधे तौर पर कोई वेतन या मासिक पैसा नहीं मिलेगा, लेकिन इस पद का बजट काफी बड़ा होता है। जीतने वाले संगठन को कुल 20 लाख रुपये का बजट दिया जाता है, जिसे छात्रसंघ की गतिविधियों, सांस्कृतिक प्रोग्राम, इवेंट्स और रिसर्व प्रोजेक्ट्स पर खर्च किया जाता है। इस पैसे का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं किया जाता है।

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डूसू चुनाव में इस बार एबीवीपी ने धमाकेदार जीत दर्ज की है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष पद समेत तीन महत्वपूर्ण सीटों पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई केवल उपाध्यक्ष पद पर ही सीमित रह गया। डूसू को राजनीति में जाने का प्लेटफार्म भी जाता है। सचिव पद पर कुणाल चौधरी और संयुक्त सचिव पद पर दीपिका झा ने जीत दर्ज की।

इन तीनों पदों पर एबीवीपी के उम्मीदवार पहले दौर से ही रुझानों में आगे थे और आखिरी मतगणना में यह जीत पक्की हुई। वहीं उपाध्यक्ष पद पर गोविंद तंवर को हार का सामना करना पड़ा। एनएसयूआई की ओर से केवल उपाध्यक्ष पद पर राहुल झांसल ने जीत हासिल की। अध्यक्ष पद के जोसलिन नंदिता चौधरी, सचिव पद के कबीर और संयुक्त सचिव पद के लवकुश भड़ाना को चुनाव में हार मिली।

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डूसू अध्यक्ष की शक्ति और जिम्मेदारी

इस अध्यक्ष का पद केवल प्रतीकात्मक नहीं होता, बल्कि यह काफी शक्तिशाली भी है। इस पद पर बैठने वाले को अलग ऑफिस दिया जाता है और वह यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक फैसलों में हिस्सा लेता है। यदि कोई निर्णय अध्यक्ष को मंजूर नहीं होता है, तो वह विरोध दर्ज करा सकता है। अध्यक्ष को यूनिवर्सिटी से जुड़ी तमाम समस्याओं को हजारों छात्रों का नेतृत्व करते हुए सुलझाना होता है। यह पद छात्र नेताओं को राजनीतिक अनुभव देने में भी मदद करता है और भविष्य में राजनीति में कदम रखने के लिए अवसर प्रदान करता है।

मतदान और कार्यकाल

छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान गुरुवार को हुआ था और इस बार 39.45 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। इसू के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का कार्यकाल कुल 11 महीने का होता है। 12वें महीने में नए चुनाव कराए जाते हैं। छात्र संगठन अपने उम्मीदवार इन पदों पर खड़ा करते हैं। अध्यक्ष का पद सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि यही संगठन के तमाम कामकाज को देखता है।
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