डूसू अध्यक्ष की शक्ति और जिम्मेदारी
इस अध्यक्ष का पद केवल प्रतीकात्मक नहीं होता, बल्कि यह काफी शक्तिशाली भी है। इस पद पर बैठने वाले को अलग ऑफिस दिया जाता है और वह यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक फैसलों में हिस्सा लेता है। यदि कोई निर्णय अध्यक्ष को मंजूर नहीं होता है, तो वह विरोध दर्ज करा सकता है। अध्यक्ष को यूनिवर्सिटी से जुड़ी तमाम समस्याओं को हजारों छात्रों का नेतृत्व करते हुए सुलझाना होता है। यह पद छात्र नेताओं को राजनीतिक अनुभव देने में भी मदद करता है और भविष्य में राजनीति में कदम रखने के लिए अवसर प्रदान करता है।
मतदान और कार्यकाल
छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान गुरुवार को हुआ था और इस बार 39.45 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। इसू के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का कार्यकाल कुल 11 महीने का होता है। 12वें महीने में नए चुनाव कराए जाते हैं। छात्र संगठन अपने उम्मीदवार इन पदों पर खड़ा करते हैं। अध्यक्ष का पद सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि यही संगठन के तमाम कामकाज को देखता है।