भगवाकरण के आरोपों पर कुलपति का जवाब
इंटरव्यू के दौरान वीसी ने उन आरोपों का भी जवाब दिया जिनमें कहा गया था कि डीयू का भगवाकरण किया जा रहा है। ऐसे दावों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा से राष्ट्रीय गौरव की भावना पैदा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह हमारा देश है। हम सभी इस देश के बच्चे हैं। शिक्षा प्रणाली को इस तरह की मानसिकता तैयार करनी चाहिए। अगले 25 वर्षों में भारत एक विकसित राष्ट्र होगा और हमारी चुनौतियां बहुत अलग होंगी। हमें ऐसे दिमाग, ऐसे नागरिक चाहिए जो हमारे देश के हितों की रक्षा करें।"
वैचारिक पूर्वाग्रह के विशिष्ट आरोप पर सिंह ने टिप्पणी की, "हम पहले से ही 800 वर्षों तक गुलामी में रहे हैं। हम नहीं चाहते कि ऐसा फिर हो। और यदि वे विशेष भगवा रंग के बारे में बात कर रहे हैं, तो भगवा त्याग, तपस्या और वैराग्य का रंग है, यह भारत का रंग है।"
साक्षात्कार में सिंह ने उन सुझावों को भी खारिज कर दिया कि दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) से बाहर निकल सकता है, तथा उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रणाली से प्रवेश में अधिक विविधता और निष्पक्षता आई है।
डीयू की वैश्विक रैंकिंग में सुधार और भविष्य की योजनाएं
उन्होंने कहा, "हम सीयूईटी के माध्यम से आने वाले छात्रों के प्रदर्शन से बहुत संतुष्ट हैं। इसमें कोई मुद्दा नहीं है, इसमें शामिल न होने का कोई सवाल ही नहीं है।"
आगे उन्होंने कहा, 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर भी बात की। अतीत में, विश्वविद्यालय में एक साथ चुनाव कराने पर चर्चा करने वाले कार्यक्रमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इस विचार का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, "एक राष्ट्र, एक चुनाव एक अच्छा कदम है। बार-बार चुनाव होने से व्यवधान पैदा होते हैं और शिक्षा पर असर पड़ता है। एक समन्वित चुनावी प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के शासन और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगी।"
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई सरकार अपने चौथे वर्ष में गिर जाती है, तो राज्य सभा को शेष अवधि के लिए शासन का कार्यभार संभाल लेना चाहिए, तथा उपराष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की शक्तियों का प्रयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "इससे अनावश्यक चुनावों पर रोक लगेगी और निरंतरता सुनिश्चित होगी।"
डीयू की भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय बुनियादी ढांचे में सुधार, संकाय भर्ती और अनुसंधान पहल पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, "हमारी क्यूएस विश्व रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो 2022 में 600+ से बढ़कर अब 328 हो गई है। हमारा लक्ष्य शीर्ष 200 और अंततः विश्व स्तर पर शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में शामिल होना है।"