दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) में इस बार यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में रिकॉर्ड दाखिले हुए हैं। कुल 1.34 लाख से अधिक छात्रों ने प्रवेश लिया है। यह संख्या पिछले दो वर्षों में सर्वाधिक है।
एसओएल में आमतौर पर हर साल करीब 1.20 लाख से 1.25 लाख दाखिले होते हैं। वर्ष 2025 में कुल 1.25 लाख छात्रों ने प्रवेश लिया था। जबकि 2024 में यह संख्या 1.18 लाख थी। 2023 में कोरोना महामारी के कारण 1.35 लाख से ज्यादा दाखिले हुए थे। इस बार 13 सितंबर तक दाखिले और फीस जमा कराने की अंतिम तिथि थी। तब तक 1.34 लाख से अधिक छात्र-छात्रों ने दाखिला पक्का कर लिया। इस बार छात्राओं के मुकाबले दस हजार ज्यादा छात्रों ने प्रवेश लिया है। बारहवीं में 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वाले छात्रों ने भी एसओएल में रुचि दिखाई है।
नए पाठ्यक्रमों में बढ़ा रुझान
कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक पायल मागो ने बताया कि एमबीए में 3500 दाखिले हुए हैं। बीएससी कंप्यूटर साइंस में 1200 और एमबीए हेल्थ केयर में 80 छात्रों ने प्रवेश लिया है। सर्वाधिक 38 हजार छात्र-छात्रों ने बीए प्रोग्राम में दाखिला लिया है। बीए प्रोग्राम के बाद बीकॉम दूसरे स्थान पर है।
उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की पसंद
स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग बारहवीं में 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वाले छात्रों के लिए भी पसंद बनता जा रहा है। इस साल ऐसे छात्रों की संख्या 2182 है। इनमें 1271 छात्राएं और 911 छात्र शामिल हैं। एसओएल में दाखिला सीयूईटी से नहीं बल्कि बारहवीं के अंकों के आधार पर होता है।
एसओएल में दाखिला किस आधार पर मिलता है?
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में दाखिले की प्रक्रिया नियमित पाठ्यक्रमों से अलग है। यहां प्रवेश के लिए साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा यानी सीयूईटी देना जरूरी नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों का दाखिला बारहवीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाता है। इसी वजह से अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिलता है। आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की पात्रता, जरूरी दस्तावेज, शुल्क और प्रवेश संबंधी नियमों की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट से जांचनी चाहिए, ताकि आवेदन करते समय किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।