दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) में सीबीसीएस (सेमेस्टर सिस्टम) लागू करने के फैसले से दाखिला ले चुके छात्रों के लिए असमंजस की स्थिति बन गई है। छात्रों ने यह समझते हुए दाखिला लिया कि उन्हें वार्षिक मोड में ही परीक्षा देनी होगी। उन्हें स्टडी मेटेरियल भी वार्षिक परीक्षाओं के अनुसार मिला है, जबकि सीबीसीएस पद्धति पर आधारित स्टडी मेटेरियल अभी तैयार भी नहीं हुआ है।
छात्रों से दाखिले के समय परीक्षा फॉर्म भी भरवाया गया है। वह भी वार्षिक परीक्षाओं के अनुसार भरा गया है। अब सेमेस्टर सिस्टम में छात्रों को कौन-कौन सी परीक्षा देनी होगी उसके बारे में छात्रों को जानकारी तक नहीं हैं। इसे लेकर छात्र संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। क्रांतिकारी युवा संगठन ने इस फैसले के विरोध में सोमवार को आर्ट्स फैकल्टी के बाहर प्रदर्शन करने का फैसला किया है। संगठन के राज्य समिति सदस्य हरीश गौतम ने कहा कि परीक्षा कब होगी, इसकी जानकारी छात्रों को कैसे मिलेगी, इसका कुछ पता नहीं है। न ही यह मालूम है कि रिजल्ट कब आएंगे। अब जानकारी मिल भी जाएगी तब भी देरी से सूचना मिलने के कारण छात्रों का परीक्षा परिणाम प्रभावित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से यह फैसला बिना किसी तैयारी के छात्रों पर थोपा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि एसओएल छात्रों को अनियमित और अव्यवस्थित कक्षाओं, लाइब्ररी की कमी, स्टडी मेटेरियल में गड़बड़ियों और लेट रिजल्ट संबंधी तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सीबीसीएस लागू करने से पूर्व छात्रों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधायें सुनिश्चित नहीं करने से आगामी सत्र में भारी अव्यवस्था होगी।
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