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आखिर क्या होता है बलिदान बैज, जिसे पहनकर विवादों में घिर गए धोनी?

Sat, 08 Jun 2019 04:22 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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क्रिकेट विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में भारतीय विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी के ग्लव्स पर बने बलिदान बैज के चिन्ह से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चूंकि धोनी द्वारा पहने गए ये दस्ताने तीन सप्ताह पहले मेरठ से ही डिलीवर हुए थे इसलिए मेरठ का नाम भी अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि किसे, कैसे और कब मिलता है बलिदान बैज... जानते हैं अगली स्लाइड में...
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किसे मिलता है बलिदान बैज-

इस बैज को पाना हर सैनिक का सपना होता है पर इसे पाने के लिए एक ऐसी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है जो शरीर के साथ-साथ लोगों के हौसले तक तोड़ देती है। अपने दुश्मनों को न केवल पहचानना बल्कि बिना किसी वार किए उनका खात्मा कर देना, ऐसे जाबाज को ये बैज मिलता है। 
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क्या है बलिदान बैज

यह कोई मामूली बैज नहीं है। चांदी की धातु से बने इस बैज में हिंदी से बलिदान लिखा होता है। बलिदान बैज का इस्तेमाल केवल पैराशूट रेजिमेंट के विशेष बल ही कर सकते हैं। किसी और व्यक्ति को इसका इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है।

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क्या था मामला

विश्व कप के अपने पहले ही मैच में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को हरा दिया था। भारत के लिए यह एक बड़ा जश्न था। विवाद तो तब खड़ा हुआ जब धोनी उस मैच में ऐसे दस्ताने पहनकर उतरे जिस पर भारतीय सेना के प्रतीक चिन्हों में से एक 'बलिदान बैज' नजर आ रहा था। क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था ICC ने इसी चिन्ह पर आपत्ति उठाई थी।
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इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के नियम

  1. इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के लोगो और ड्रेस कोड के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी तय ड्रेस या किट से छेड़छाड़ नहीं कर सकता।
  2. ड्रेस पर किसी प्रकार का दूसरा रंग भी नहीं इस्तेमाल किया जा सकता।
  3. ड्रेस पूरी तरह से साफ होनी चाहिए और उसके रंग में भी कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
  4. किसी भी खिलाड़ी, बोर्ड या फिर संस्थान को किसी विशेष लोगो या बदलाव के लिए पहले से अनुमति मांगनी होगी।
  5. आईसीसी से अप्रूवल मिलने के बाद ही ड्रेस में कुछ बदलाव के साथ प्लेयर मैदान में उतर सकता है।
  6. किसी भी प्लेयर को तीन से ज्यादा लोगो अपनी ड्रेस पर इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
  7. ग्लव्स पर सिर्फ मैन्युफैक्चरर का ही लोगो हो सकता है।
  8. खिलाड़ी और टीम के अधिकारियों को आर्म बैंड या ड्रेस के जरिए कोई भी निजी मेसेज देने की अनुमति नहीं है।
  9. आईसीसी के क्रिकेट ऑपरेशंस डिपार्टमेंट से अनुमति लेने के बाद ऐसा किया जा सकता है।
  10. आईसीसी के नियमों के मुताबिक किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक संदेश को जारी के लिए अनुमति नहीं मिल सकती।
  11. यदि कोई बोर्ड या टीम किसी संदेश को लेकर मंजूरी देती है और आईसीसी असहमत है तो फिर अंतिम निर्णय अंतरराष्ट्रीय संस्था का ही माना जाएगा।
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कौन होते हैं पैरा कमांडो

भारतीय सेना की एक स्पेशल फोर्सेज की टीम होती है जो आतंकियों से लड़ने और आतंकियों के इलाके में घुसकर उन्हें मारने में दक्ष होती है। मुश्किल ट्रेनिंग और पैराशूट से कूदकर दुश्मन के इलाके में घुसकर दुश्मन को मारने में महारत हासिल करने वाले इन सैनिकों को पैरा कमांडो कहा जाता है। इन्हीं पैरा कमांडो को एक खास तरह की निशानी/चिन्ह दी जाती है, जिसे बलिदान चिन्ह/बैज कहा जाता है। यह बैज उन्हें ही मिलता है जो स्पेशल पैरा फोर्सेज से जुड़े हो।
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पैरा रेजिमेंट में शामिल है धोनी का नाम

महेंद्र सिंह धोनी को 2011 में टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि से नवाजा गया था। उसके बाद साल 2015 में धोनी ने पैरा फोर्सेज के साथ बुनियादी ट्रेनिंग और फिर पैराशूट से कूदने की स्पेशल ट्रेनिंग भी पूरी की जिसके बाद धोनी को पैरा रेजिमेंट में शामिल किया गया और उन्हें ये बैज लगाने की अनुमति दी गई।
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पहले भी धोनी फोर्सेज से जुड़ी निशानियों का कर चुके हैं इस्तेमाल

यह पहली बार नहीं है जब धोनी ने पैरा फोर्सेज से जुड़ी निशानी को पहना हो, इससे पहले वो IPL के दौरान बलिदान बैज वाले टोपी और फोन के कवर पर इस निशानी को लगाए देखे जा चुके हैं। धोनी अक्सर सेना की टोपी या सेना सी जुड़ी निशानियों को अपने कपड़ों या बैग पर लगाए दिख जाते हैं। वे पहले ही अपने इरादे बताते हुए कह चुके हैं कि क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वो सेना में जाकर देश सेवा करना चाहते हैं।
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