डिजिटल साक्षरता ही साइबर धोखाधड़ी से बचाव का रास्ता
राष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक में देश की अर्थव्यवस्था और समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाने की बड़ी ताकत है। लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कई बार इसका गलत इस्तेमाल ऑनलाइन और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जाता है। इससे लोगों की जिदगी भर की कमाई चली जाती है और उन्हें मानसिक व सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसी धोखाधड़ी से बचाने के लिए जागरूक करना और सतर्क रहना बहुत जरूरी है। राष्ट्रपति ने ज़ोर देकर कहा कि डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि बच्चे छोटी उम्र से ही तकनीक के फायदे और नुकसान दोनों को समझ सकें।
डिजिटल धोखाधड़ी पर सरकार की तैयारी और तकनीक की नई चुनौतियां
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बताया कि डिजिटल धोखाधड़ी रोकने और उसकी शिकायत दर्ज कराने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इसके तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्रणाली और साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र बनाए गए हैं।
उन्होंने सभी संबंधित लोगों से अपील की कि वे डिजिटल और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए मिलकर काम करें, ताकि लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी से सुरक्षित रह सकें।
उन्होंने कहा, "हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब प्रौद्योगिकी अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही है। नए आविष्कार इतनी तेज़ी से आ रहे हैं कि हमारी प्रणालियाँ, कौशल और व्यावसायिक मॉडल अक्सर उनके साथ तालमेल बिठाने में संघर्ष कर रहे हैं। साथ ही, ये तीव्र प्रगति गंभीर चुनौतियाँ भी ला सकती हैं, जिनमें साइबर सुरक्षा खतरे, डीपफेक, गलत सूचना और प्रौद्योगिकी पर बढ़ती निर्भरता शामिल हैं।"
हालांकि, मुरमू ने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों का नवाचार और विकास पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
फिनटेक और समावेशन पर जोर
उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत की वित्तीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। अब किसान, छोटे दुकानदार और महिलाएं आसानी से बैंक खातों में पैसा पा रही हैं और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रही हैं। उनके लिए फिनटेक अब सिर्फ एक तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन गया है।
महिलाओं में वित्तीय साक्षरता के प्रसार पर जोर देते हुए, देश की प्रथम नागरिक ने कहा, “महिलाएं एक महत्वपूर्ण वर्ग हैं जिन पर फिनटेक को बढ़ावा देने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। फिनटेक इकोसिस्टम को उन्हें केवल अंतिम उपयोगकर्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि नेताओं, पेशेवरों और उद्यमियों के रूप में भी देखना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जब भी कोई नया डिजिटल प्लेटफॉर्म, उत्पाद या नीति बनाई जाए, तो यह देखा जाना चाहिए कि क्या वह महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय व्यवस्था में सक्रिय रूप से शामिल कर रही है या नहीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि फिनटेक होने से ही सबका विकास अपने आप नहीं हो जाता। आज भी दूर-दराज, आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में कई लोग डिजिटल साधनों को सही तरह से नहीं जानते। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को डिजिटल कौशल देना बहुत जरूरी है, ताकि वे विकास की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।
इसके साथ ही उन्होंने उद्यमियों और नए विचार लाने वालों से अपील की कि वे तकनीक को सामाजिक न्याय और सबको साथ लेकर चलने का साधन बनाएं।