1875 में हुई थी रचना
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ की रचना 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के दिन मानी जाती है। यह पहली बार उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ के हिस्से के रूप में बंगदर्शन पत्रिका में प्रकाशित हुआ था, जिसे बाद में 1882 में पुस्तक के रूप में जारी किया गया।
यह गीत मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है और देश की एकता व आत्मसम्मान की भावना को कवितामय रूप देता है। यह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन गया।
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि "वंदे मातरम", जिसने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, उसे राष्ट्रगान "जन गण मन" के समान सम्मान प्राप्त होगा।