Delhi University: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (4 जनवरी) को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति की सराहना की, जिन्होंने विश्वविद्यालय के नए कॉलेज का नाम भाजपा विचारक वीर सावरकर के नाम पर रखा और इस फैसले का विरोध करने वालों पर "औपनिवेशिक मानसिकता" रखने का आरोप लगाया। इस कार्यक्रम में भाजपा सांसद मनोज तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
शुक्रवार (3 जनवरी)को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नजफगढ़ के रोशनपुरा में वीर सावरकर कॉलेज की आधारशिला रखी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सावरकर एक महान राष्ट्रवादी थे, लेकिन औपनिवेशिक मानसिकता वाले समाज का एक वर्ग है, जिसे डीयू कॉलेज का नाम उनके नाम पर रखने पर आपत्ति है। मैं डीयू के कुलपति को उनके नाम पर नया कॉलेज समर्पित करने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।
लैपटॉप और टैबलेट का किया वितरण
शिक्षा मंत्री यहां दिल्ली विश्वविद्यालय में 'सशक्त बेटी और ई-दृष्टि' नामक कार्यक्रम में बोल रहे थे, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी के माध्यम से समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों को सशक्त बनाना है। इस पहल के तहत, प्रधान ने विश्वविद्यालय में अनाथ छात्राओं, एकल अभिभावकों की बेटियों और दृष्टिबाधित छात्राओं को लैपटॉप और टैबलेट वितरित किए।
इस कार्यक्रम में एलआईसी गोल्डन जुबली फाउंडेशन द्वारा दान की गई एक उन्नत जीवन रक्षक एम्बुलेंस का शुभारंभ और एक पुस्तक, "डोनर क्रॉनिकल 2024 का स्मारक खंड" का विमोचन भी हुआ, जो विश्वविद्यालय में दानदाताओं के योगदान पर प्रकाश डालती है।
शिक्षा में "धर्म" के महत्व पर जोर
प्रधान ने विश्वविद्यालय को दिल्ली विश्वविद्यालय फाउंडेशन समूह के माध्यम से अपने पूर्व छात्रों के नेटवर्क से दान मांगने के लिए भी प्रोत्साहित किया, जिसने लैपटॉप के वितरण में सहायता की। अपने संबोधन में डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने शिक्षा में "धर्म" (धार्मिकता) के महत्व पर जोर दिया। एक संस्कृत श्लोक का पाठ करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म महत्वपूर्ण है। 9/11 के हमले सुशिक्षित व्यक्तियों द्वारा किए गए थे, लेकिन उनमें धर्म की भावना का अभाव था, जिसके कारण उन्होंने ऐसे कृत्य किए।