दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (DU SOL) में छात्रों की परेशानी थमने का नाम नहीं ले रही। ये परेशानी सेमेस्टर परीक्षा को लेकर है। यहां पहले सेमेस्टर की परीक्षा 24 नवंबर 2019 से शुरू होनी थी। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। विवि द्वारा सेमेस्टर परीक्षा कराने के समय को लेकर मामला दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) तक पहुंच गया। यहां फैसला हुआ कि अब पहले सेमेस्टर की परीक्षा भी दूसरे सेमेस्टर के साथ मई-जून 2020 में ली जाएगी। लेकिन विवाद यहां भी खत्म नहीं हुआ है।
दरअसल डीयू एसओएल में इसी सत्र से सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई है। पहले यहां वार्षिक परीक्षाएं हुआ करती थीं। लेकिन छात्रों का आरोप है कि संस्थान ने जल्दबाजी में सेमेस्टर प्रणाली तो लागू कर दी, पर उस अनुसार न तो पढ़ाई हो पाई है, न ही सिलेबस पूरा किया गया है और न ही उचित स्टडी मैटेरियल उपलब्ध कराया गया है।
इसलिए कुछ छात्रों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट में छात्रों ने बताया कि शिक्षकों ने अब तक उन्हें पहले सेमेस्टर की परीक्षा के लिए तैयार नहीं किया है।
छात्रों के कोर्ट पहुंचने के बाद इस मामले में कुलपति ने रिपोर्ट सौंपी। इसमें दो रास्ते सुझाए गए। पहला ये कि पहले सेमेस्टर की परीक्षा दिसंबर 2019 में ले ली जाए। और दूसरा ये कि पहले व दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा एक साथ मई-जून 2020 में ली जाए। इसपर याचिकाकर्ताओं ने दूसरा विकल्प चुना।
हालांकि स्कूल ऑफ ओपन लर्निंक के अधिकारियों का कहना है कि छात्र पहला विकल्प चाहते थे। यानी दिसंबर में परीक्षा देना चाहते थे। एसओएल के विशेष अधिकारी रमेश भरद्वाज ने कहा कि 'हमने हजारों छात्रों से बात की, वे पहला विकल्प चुनना चाहते थे। हालांकि हम कोर्ट के निर्देश का ही अनुसरण करेंगे।'
इधर अव्यवस्थित तरीके से सेमेस्टर सिस्टम व च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) लागू करने का विरोध कर रहे केवाईएस के सदस्यों का कहना है कि 'छात्रों ने मई-जून में एक साथ परीक्षा को ही प्राथमिकता दी। क्योंकि जो स्टडी मैटीरियल छात्रों को उपलब्ध कराया गया है, वो इतना बुरा है कि एक महीने परीक्षा स्थगित करने का कोई फायदा नहीं होगा।'