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Delhi: रोहिणी-मुंडका समेत दिल्ली में कई जगह ध्वस्त होंगे 34 सरकारी स्कूल, आखिर वजह क्या? जानें सरकार का प्लान

Fri, 14 Aug 2026 10:42 AM IST
Shahin Praveen पीटीआई, नई दिल्ली

सार

Delhi Government Schools: दिल्ली सरकार ने स्कूलों की सुरक्षा और बेहतर बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखते हुए 34 सरकारी स्कूल भवनों को ध्वस्त करने का फैसला किया है। उनकी जगह करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से 27 नए और आधुनिक स्कूल बनाए जाएंगे, जिनका निर्माण अगले 18 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।
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Delhi School - फोटो : AI
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विस्तार
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Delhi School: एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार सुरक्षा और बुनियादी ढांचे संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए अपने 34 स्कूलों को ध्वस्त करने जा रही है, जबकि शहर भर में 27 नए स्कूल भवनों का निर्माण करेगी।

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अधिकारी ने बताया कि लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत से खाली भूखंडों पर बन रही नई स्कूल इमारतों का निर्माण 18 महीनों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है, और तेजी से निष्पादन और निगरानी के लिए स्थलों को पांच भौगोलिक समूहों में विभाजित किया गया है।

जिन 34 स्कूलों को गिराने के लिए चिन्हित किया गया है, उनमें से 16 पर काम चल रहा है, जबकि नौ मामलों को मंजूरी मिल चुकी है। अधिकारी ने बताया कि इनमें से कुछ स्कूलों में जलभराव की समस्या है, जबकि अन्य में सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं या वे ऐसी जगहों पर स्थित हैं जिन्हें छात्रों के लिए अनुपयुक्त माना जाता है।

सभी सरकारी स्कूलों की डिजिटल प्रोफाइलिंग के बाद लिया गया फैसला

अधिकारी ने बताया कि यह कदम शहर के सभी 1,090 सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा जरूरतों का पता लगाने के लिए की गई डिजिटल प्रोफाइलिंग के बाद उठाया गया है।

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उन्होंने कहा कि सभी 1,090 स्कूलों की प्रोफाइलिंग पूरी हो चुकी है और शिक्षा विभाग अब डेटा का आकलन कर रहा है ताकि हर स्कूल में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों का पता लगाया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि कई स्कूलों में बिजली सप्लाई, जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर और पानी से जुड़ी समस्याएं हैं।

इस प्रक्रिया में क्लासरूम और बिल्डिंग के स्तर पर स्कूल की संपत्तियों का विस्तृत डॉक्यूमेंटेशन शामिल है, जिसमें सफाई, पीने के पानी की सुविधा, सुरक्षा इंतजाम, फर्नीचर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, किचन और लैब शामिल हैं।

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आधुनिक तकनीक से होगी स्कूल भवनों की जांच

  • स्कूल भवनों के हर कमरे को 360-डिग्री इमेजिंग के जरिए डिजिटाइज किया गया है, जिससे उनका स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हुआ है।
  • इस डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से वर्चुअल वॉकथ्रू किया जा सकता है, जिससे योजना बनाने और फैसले लेने में आसानी होगी।
  • भविष्य के निर्माण और मरम्मत कार्यों की योजना, बजट और निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे, हाई-रिजॉल्यूशन ऑर्थोमोजेक इमेज और GIS आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
  • स्कूल भवनों की मजबूती जांचने के लिए विशेष टीमें विजुअल निरीक्षण और नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट कर रही हैं।
  • इन परीक्षणों में अल्ट्रासोनिक पल्स टेस्ट और रिबाउंड हैमर टेस्ट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • वैज्ञानिक आकलन के आधार पर स्कूल भवनों को सुरक्षित रखने, मरम्मत करने, रेट्रोफिटिंग करने या ध्वस्त करने की श्रेणियों में बांटा जाएगा।

27 नए स्कूलों के निर्माण के लिए मांगी गईं बोलियां

शिक्षा निदेशालय (DoE) ने 27 नए स्कूलों के टर्नकी निर्माण कार्य के लिए केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) से बोलियां आमंत्रित की हैं। इन परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट-कम-EPC एजेंसी नियुक्त की जाएगी, जो निर्माण कार्य की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी का जिम्मा संभालेगी। 27 स्कूल निर्माण स्थलों को बेहतर प्रबंधन और तेज कार्यान्वयन के लिए पांच क्लस्टर में बांटा गया है।

क्लस्टरवार स्कूल साइट्स

  • क्लस्टर 1: नरेला और बवाना में 6 प्लॉट
  • क्लस्टर 2: भलस्वा, सलेमपुर माजरा और दरियापुर कलां में 5 प्लॉट
  • क्लस्टर 3: रोहिणी, मुंडका और सावदा घेवरा में 5 प्लॉट
  • क्लस्टर 4: शालीमार बाग, बक्करवाला, हस्तसाल, श्याम विहार और नंगली विहार में 5 प्लॉट
  • क्लस्टर 5: कुतुबापुर, कापसहेड़ा, जाफरपुर, जौनपुर, सतबारी और असोला में 6 प्लॉट
  • अधिकारियों के अनुसार, इन नए स्कूलों के निर्माण से छात्रों को बेहतर और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
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