सरकार का मानना है कि छात्रों में जागरूकता बढ़ाकर उन्हें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाया जा सकता है। इससे न केवल बच्चों में अच्छी आदतें विकसित होंगी, बल्कि दिल्ली में हवा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
सर्कुलर में विभाग ने स्कूलों से कहा है कि वे इस महीने से ही ये गतिविधियां शुरू करें। इनमें पोस्टर बनाने, स्लोगन लिखने, निबंध और भाषण प्रतियोगिताएं और नुक्कड़ नाटक जैसे तरीकों से गाड़ियों से निकलने वाले धुएं, सड़क की धूल, निर्माण कार्य और प्रदूषण के अन्य स्रोतों के बारे में जागरूकता फैलाई जाएगी। सर्कुलर के मुताबिक, ज्यादातर गतिविधियों में कक्षा 6 से 12 तक के छात्र हिस्सा लेंगे, जबकि कुछ कार्यक्रमों में सभी छात्र शामिल होंगे।
हर महीने अलग-अलग प्रदूषण स्रोतों पर होंगे जागरूकता कार्यक्रम
सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) एक्शन प्लान के अनुसार, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं पर जागरूकता कार्यक्रम जुलाई से हर महीने आयोजित किए जाएंगे। वहीं, सड़क की धूल पर अभियान जुलाई से सितंबर तक, निर्माण कार्य की धूल पर सितंबर से नवंबर तक, नगर निगम के ठोस कचरे और पराली जलाने पर नवंबर और दिसंबर में, औद्योगिक उत्सर्जन पर जनवरी में, थर्मल पावर प्लांट पर फरवरी में और डीजल जनरेटर सेट पर मार्च में अभियान चलाए जाएंगे।
इसके साथ ही, विभाग ने स्कूल प्रमुखों (HoS) को पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाले तेज धार वाले मांझे पर लगी रोक के बारे में जागरूकता फैलाने का भी निर्देश दिया है। यह एक्शन प्लान 'वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग' (CAQM) के फ्रेमवर्क और 'दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति' (DPCC) से मिले निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे इसी महीने लागू किया जाएगा।
इसमें आगे कहा गया है कि निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्कूलों में इस योजना को लागू करना सुनिश्चित करें। साथ ही, एक्शन प्लान में बताई गई तारीख के महीने की 25 तारीख तक गतिविधियों की तस्वीरों के साथ 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' (ATR) विज्ञान शाखा को सौंपें।