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CBSE: दोहरी परीक्षा मसौदे पर दिल्ली अभिभावक संघ ने सीबीएसई को लिखा पत्र, बदलावों के दिए सुझाव

Fri, 28 Feb 2025 09:50 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE: दिल्ली अभिभावक संघ ने सीबीएसई को दोहरी परीक्षा प्रणाली मसौदे पर कुछ सुझाव पेश किए हैं। डीपीए ने कुछ नियमों का स्वागत किया और अन्य में बदलाव के लिए सुझाव भेजे हैं।
 
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दिल्ली अभिभावक संघ ने सीबीएसई को दोहरी परीक्षा प्रणाली मसौदे पर कुछ सुझाव पेश किए हैं। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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CBSE: दिल्ली अभिभावक संघ (DPA) ने सीबीएसई को कक्षा 10 की दोहरी परीक्षा प्रणाली पर पत्र लिखा है। इसमें कुछ नियमों का स्वागत किया गया है, जबकि कुछ में बदलाव की जरूरत बताई गई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने मंगलवार को 2026 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित किए जाने की घोषणा की।

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अधिकारियों के अनुसार, इस योजना पर 9 मार्च तक जनता की राय ली जाएगी, जिसके बाद अंतिम नीति तय होगी। मसौदे के मुताबिक, पहली परीक्षा 17 फरवरी से 6 मार्च तक और दूसरी 5 से 20 मई तक होगी। डीपीए अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने कहा, "हम उन नियमों का समर्थन करते हैं जो छात्रों के लिए फायदेमंद हैं, जैसे स्कोर सुधार का विकल्प और तनाव कम करने के लिए परीक्षा दो बार देने की अनुमति।"

गौतम ने यह भी बताया कि अकादमिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का फैसला भी अच्छा है। इससे उन छात्रों को मदद मिलेगी, जो पहली परीक्षा में एक से पांच विषयों में अनुत्तीर्ण हो जाते हैं। अब उन्हें "आवश्यक पुनरावृत्ति" के बजाय "सुधार श्रेणी" में रखा जाएगा।

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कुछ नियमों पर आपत्ति

डीपीए ने विषय बदलने की सुविधा का समर्थन किया है, लेकिन चिंता जताई कि कुछ प्रावधान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के लक्ष्य के विपरीत हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि दूसरी परीक्षा के नतीजे 30 जून तक आएंगे, जिससे कक्षा 11 की पढ़ाई तीन महीने देरी से शुरू होगी। इससे छात्रों को सीखने के लिए कम समय मिलेगा।

इसके अलावा, मसौदे में परीक्षा शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो पहले ही लिया जाएगा और वापस नहीं होगा। जो छात्र कक्षा 11 में स्कूल बदलेंगे, उनके अभिभावकों को देर से परिणाम आने के कारण अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। परीक्षा की अवधि लंबी होने से निजी कोचिंग का चलन बढ़ सकता है, जिससे माता-पिता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

छात्रों पर बढ़ेगा दबाव

बयान में कहा गया कि इस नई प्रणाली से छात्रों पर तनाव कम होने के बजाय बढ़ सकता है। लंबे समय तक परीक्षा प्रक्रिया चलने से वे लगातार दबाव में रहेंगे। साथ ही, कक्षा 10 का सत्र 15 महीने और कक्षा 11 का सत्र सिर्फ 7 महीने का होगा, जिससे स्कूलों को पाठ्यक्रम पूरा करने में दिक्कत होगी। इससे छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ेगा।
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गर्मी की छुट्टियों पर असर

मई में होने वाली दूसरी परीक्षा गर्मी की छुट्टियों को भी प्रभावित करेगी। छात्र और शिक्षक आराम के बजाय परीक्षा की तैयारी में व्यस्त रहेंगे, जिससे उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों पर असर पड़ेगा। डीपीए ने सुझाव दिया है कि दोनों परीक्षाओं के बीच कम अंतराल रखा जाए।

डीपीए ने प्रस्ताव रखा कि पहली परीक्षा जनवरी और दूसरी फरवरी में होनी चाहिए। इससे छात्रों को अपनी तैयारी के अनुसार परीक्षा देने का अवसर मिलेगा, शैक्षणिक देरी रोकी जा सकेगी, और वित्तीय दबाव कम होगा। इससे कक्षा 11 में प्रवेश भी सुचारू रूप से हो सकेगा।
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