कुछ नियमों पर आपत्ति
डीपीए ने विषय बदलने की सुविधा का समर्थन किया है, लेकिन चिंता जताई कि कुछ प्रावधान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के लक्ष्य के विपरीत हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि दूसरी परीक्षा के नतीजे 30 जून तक आएंगे, जिससे कक्षा 11 की पढ़ाई तीन महीने देरी से शुरू होगी। इससे छात्रों को सीखने के लिए कम समय मिलेगा।
इसके अलावा, मसौदे में परीक्षा शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो पहले ही लिया जाएगा और वापस नहीं होगा। जो छात्र कक्षा 11 में स्कूल बदलेंगे, उनके अभिभावकों को देर से परिणाम आने के कारण अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। परीक्षा की अवधि लंबी होने से निजी कोचिंग का चलन बढ़ सकता है, जिससे माता-पिता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
छात्रों पर बढ़ेगा दबाव
बयान में कहा गया कि इस नई प्रणाली से छात्रों पर तनाव कम होने के बजाय बढ़ सकता है। लंबे समय तक परीक्षा प्रक्रिया चलने से वे लगातार दबाव में रहेंगे। साथ ही, कक्षा 10 का सत्र 15 महीने और कक्षा 11 का सत्र सिर्फ 7 महीने का होगा, जिससे स्कूलों को पाठ्यक्रम पूरा करने में दिक्कत होगी। इससे छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ेगा।
गर्मी की छुट्टियों पर असर
मई में होने वाली दूसरी परीक्षा गर्मी की छुट्टियों को भी प्रभावित करेगी। छात्र और शिक्षक आराम के बजाय परीक्षा की तैयारी में व्यस्त रहेंगे, जिससे उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों पर असर पड़ेगा। डीपीए ने सुझाव दिया है कि दोनों परीक्षाओं के बीच कम अंतराल रखा जाए।
डीपीए ने प्रस्ताव रखा कि पहली परीक्षा जनवरी और दूसरी फरवरी में होनी चाहिए। इससे छात्रों को अपनी तैयारी के अनुसार परीक्षा देने का अवसर मिलेगा, शैक्षणिक देरी रोकी जा सकेगी, और वित्तीय दबाव कम होगा। इससे कक्षा 11 में प्रवेश भी सुचारू रूप से हो सकेगा।