11 नाबालिग छात्रों ने दायर की थीं याचिकाएं
निदेशालय की ओर से कहा गया कि केवल कुछ ही खेल खुले में होते हैं, अधिकांश इनडोर खेले जाते हैं। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि अधिकारी “आपराधिक लापरवाही” बरत रहे हैं और केवल अगले वर्ष से कैलेंडर संशोधित करने की मांग की है। यह याचिका 11 नाबालिग छात्रों द्वारा दायर की गई है, जो सक्रिय रूप से दिल्ली और देशभर में आयोजित खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं।
याचिका में तर्क दिया गया है कि:
- वैज्ञानिक रूप से और न्यायिक तौर पर माना गया है कि दिल्ली में सर्दियों के महीनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति होती है।
- फिर भी साल-दर-साल इसी दौरान आउटडोर खेल कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे बच्चों पर गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव पड़ता है।
- इस अवधि में AQI अक्सर "Severe" श्रेणी में रहता है।
- बच्चों को जहरीली हवा में कठिन शारीरिक गतिविधि के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।
- इन परिस्थितियों से फेफड़ों की वृद्धि रुक सकती है, संज्ञानात्मक क्षमता प्रभावित होती है और हृदय पर तीव्र दबाव पड़ता है।
याचिका में DoE और SFIG को निर्देश देने की मांग की गई कि सभी स्तरों (जोनल, इंटर-जोनल, राज्य और राष्ट्रीय) पर आउटडोर खेलों का कैलेंडर ऐसे महीनों में निर्धारित किया जाए जब हवा की गुणवत्ता सुरक्षित हो। फाइलिंग के समय दिल्ली GRAP-III आपात योजना के तहत थी और GRAP-IV लागू होने का खतरा था।