याचिका में पारदर्शिता की कमी का आरोप
याचिका में तर्क दिया गया कि एक बार जब अधिकारी किसी खास कैटेगरी में सीटों की उपलब्धता बताते हुए फाइनल सीट मैट्रिक्स जारी कर देते हैं, तो वे किसी गुप्त तरीके से सीटों की वास्तविक स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं कर सकते।
याचिका में कहा गया, "नोटिफाई की गई सीटों के अलॉटमेंट के तरीके में पारदर्शिता न होने के कारण, फाइनल सीट पोजीशन में दिखाई गई सीटों की उपलब्धता के बावजूद योग्य उम्मीदवार पीछे छूट सकते हैं, जिसमें याचिकाकर्ता की बेटी भी शामिल है, जिसने उस जानकारी के आधार पर काउंसलिंग प्रोसेस में हिस्सा लिया था।" इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी।