शिक्षकों को मिली जिम्मेदारी
शिक्षकों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे छात्रों को सुरक्षित तरीके से काम करना, टीम में मिलकर कार्य करना और सीखी हुई चीजों को असली जीवन में इस्तेमाल करना सिखाएं। छात्रों का मूल्यांकन लिखित परीक्षा, मौखिक प्रस्तुति, एक्टिविटी बुक्स, पोर्टफोलियो और शिक्षकों की निगरानी के आधार पर होगा। इन गतिविधियों के लिए साल में कुल 110 घंटे निर्धारित किए गए हैं।
2 जून 2025 को जारी सर्कुलर में शिक्षा निदेशालय (DoE) ने स्कूलों से कहा है कि वे यह जानकारी जुटाएं कि कितने छात्रों ने व्यावसायिक विषय लिए हैं, कितने रोजगार में रुचि रखते हैं और इन विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षक कौन हैं। इससे यह तय करने में आसानी होगी कि किस स्कूल के किन छात्रों को कौन-से उद्योग से जोड़ा जा सकता है।
फिलहाल दिल्ली के 900 से अधिक सरकारी स्कूलों में यह व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम चल रहा है। इनमें से 625 स्कूल दिल्ली सरकार द्वारा और 360 स्कूल समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत आते हैं। यह पूरी योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है, जो बच्चों को सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि रोजगार के लायक स्किल देने पर जोर देती है।
हाल ही में, मई 2025 में दिल्ली सरकार ने एक और पहल की है, जिसके तहत अब कक्षा 6वीं से 8वीं तक के छात्रों के लिए भी पूर्व-व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम (Pre-Vocational Education) शुरू किया गया है। इसका मकसद है कि बच्चे शुरू से ही हाथों से काम करने की आदत डालें और पढ़ाई को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखें।
यह पहल छात्रों को पढ़ाई के बाद करियर की ओर एक मजबूत शुरुआत देने का प्रयास है, खासकर उन युवाओं के लिए जो पारंपरिक कॉलेज शिक्षा की बजाय सीधे कामकाज की दुनिया में उतरना चाहते हैं।