राजस्थान बोर्ड की दो होनहार बेटियों, दिव्या भादू और दीपिका, ने विज्ञान संकाय में 99.80% अंक पाकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। जहां दिव्या बाड़मेर के एक सहायक ग्राम सेवक की बेटी हैं, वहीं दीपिका एक कारपेंटर (बढ़ई) की बेटी हैं। दोनों की सफलता में सबसे बड़ी समानता यह है कि दोनों ने बिना किसी मानसिक बोझ के सेल्फ स्टडी की और दोनों का भविष्य का सपना आईएएस अधिकारी बनकर देश सेवा करना है।
बाड़मेर की रहने वाली दिव्या भादू ने सीकर के लोसल स्थित शेखावाटी स्कूल में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। उनके पिता सूजाराम सहायक ग्राम सेवक हैं। दिव्या ने अपनी सफलता का मंत्र बताते हुए कहा कि वह रोजाना चार से पांच घंटे एक्स्ट्रा सेल्फ स्टडी करती थीं और छुट्टियों में भी उन्होंने अपनी पढ़ाई का क्रम नहीं टूटने दिया।
राजस्थान की ही एक और गौरव, दीपिका, एक साधारण कारपेंटर परिवार से आती हैं। दीपिका ने साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों तो संसाधन मायने नहीं रखते। उन्होंने बिना किसी दबाव के एक निश्चित शेड्यूल बनाकर पढ़ाई की। दीपिका के लिए उनके माता-पिता और ताई-ताऊ जी सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे, जिन्होंने उन्हें हमेशा बेस्ट करने की सलाह दी।
अनुशासन और टाइम टेबल से किया कमाल
दीपिका और दिव्या का मानना है कि पढ़ाई को बर्डन यानी बोझ समझकर कभी नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक निश्चित शेड्यूल बनाया था। उनकी दिनचर्या में सेल्फ स्टडी और स्कूल में कराए गए रिवीजन को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई।
दीपिका के लिए उनके माता-पिता के साथ-साथ उनके ताई और ताऊ जी सबसे बड़े मोटिवेटर रहे। दीपिका कहती हैं कि मुझे हमेशा घर से यही सलाह मिली कि अपना बेस्ट दो, परिणाम की चिंता मत करो। मेहनत करते गए और आज रिजल्ट अब सबके सामने है।
सफलता का मंत्र क्या है?
दीपिका और दिव्या ने बताया कि सफलता का एकमात्र मंत्र निरंतरता है। उन्होंने कभी भी अपनी पढ़ाई को अधूरा नहीं छोड़ा। स्कूल के पाठ को उसी दिन घर पर दोहराना और खुद के नोट्स बनाना उनकी सफलता का मुख्य स्तंभ रहा।
देश की सेवा करना चाहती हैं दीपिका
इतने शानदार अंकों के साथ इंटर पास करने के बाद, दीपिका अब देश की सेवा करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वे सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करेंगी और एक प्रशासनिक अधिकारी बनकर समाज में बदलाव लाना चाहती हैं।