दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा 17 वर्षीय रिया ने बताया कि "मैंने सीयूईटी आवेदन पत्र में अपनी पसंद के रूप में दुमका (झारखंड) और देवघर (झारखंड) परीक्षा केंद्रों को चुना, लेकिन मुझे 26 मई को अपनी परीक्षा के लिए केंद्र के रूप में भुवनेश्वर (खोरधा) मिला। मेरे कई दोस्त इस तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं।
जम्मू और कश्मीर में अपेक्षाकृत गरीब पृष्ठभूमि के छात्र सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं। शेख दानियाल ने कहा "मैं कश्मीर से हूँ। मेरा परीक्षा केंद्र यहां से लगभग 500 किमी दूर चंडीगढ़ में है। मैं एक सुदूर इलाके में रहता हूं। कृपया इस प्रक्रिया को समझाएं।
17 वर्षीय फैसल रशीद ने कहा, "मैं शोपियां, कश्मीर से हूं, और मेरा आवंटित शहर बठिंडा, पंजाब है, जो यहां से लगभग 227 किलोमीटर दूर है। जब मैंने परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, तो मैंने इसका विकल्प नहीं चुना था। राशिद ने कहा, "उन छात्रों पर यह अतिरिक्त बोझ डालना अनुचित है, जो पहले से ही उच्च शिक्षा हासिल करने में बहुत सारी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। छात्र अपनी वित्तीय परिस्थितियों की परवाह किए बिना प्रवेश परीक्षा में प्रतिस्पर्धा करने और शिक्षा तक पहुंच के समान अवसरों के हकदार हैं।"